श्रीमद्भगवद्गीता
भगवान का गीत — सम्पूर्ण।
कुरुक्षेत्र की भूमि पर श्रीकृष्ण और अर्जुन का संवाद। 18 अध्याय, 700 श्लोक — कर्म, धर्म, भक्ति और आत्म-ज्ञान का वह गीत जो सहस्राब्दियों से प्रकाश दे रहा है। यहाँ हर श्लोक संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेज़ी में।
18
अध्याय
701
श्लोक उपलब्ध
72
विषय
3
भाषाएँ
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सभी 18 अध्याय
अर्जुन के विषाद से लेकर मोक्ष-संन्यास के अंतिम उपदेश तक। हर अध्याय एक योग है — एक मार्ग। किसी भी अध्याय पर क्लिक करें।

अध्याय 1
अर्जुन विषाद योग
अर्जुन का विषाद

अध्याय 2
सांख्य योग
ज्ञान का योग

अध्याय 3
कर्म योग
कर्म का योग

अध्याय 4
ज्ञान कर्म संन्यास योग
ज्ञान और कर्म-संन्यास का योग

अध्याय 5
कर्म संन्यास योग
संन्यास का योग

अध्याय 6
ध्यान योग
ध्यान का योग

अध्याय 7
ज्ञान विज्ञान योग
ज्ञान-विज्ञान का योग

अध्याय 8
अक्षर ब्रह्म योग
अक्षर ब्रह्म का योग

अध्याय 9
राजविद्या राजगुह्य योग
राजविद्या और राजगुह्य का योग

अध्याय 10
विभूति योग
ईश्वर की विभूतियों का योग

अध्याय 11
विश्वरूप दर्शन योग
विश्वरूप दर्शन का योग

अध्याय 12
भक्ति योग
भक्ति का योग

अध्याय 13
क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग
क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का योग

अध्याय 14
गुणत्रय विभाग योग
त्रिगुण-विभाग का योग

अध्याय 15
पुरुषोत्तम योग
पुरुषोत्तम का योग

अध्याय 16
दैवासुर संपद् विभाग योग
दैवी और आसुरी संपदा का योग

अध्याय 17
श्रद्धात्रय विभाग योग
त्रिविध श्रद्धा का योग

अध्याय 18
मोक्ष संन्यास योग
मोक्ष-संन्यास का योग