अध्याय 16 · दैवी और आसुरी संपदा का योग

दैवासुर संपद् विभाग योग

दो प्रकृतियाँ, दैवी और आसुरी। ये दूर के पात्र नहीं, हर मनुष्य के भीतर की प्रवृत्तियाँ हैं।

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Wisdom translation, edited by Ankur Shukla. Commentary AI-drafted, human-reviewed. Reviewed June 2026. Methodology →

Krishna on divine and demoniac qualities — the two natures
प्रथम श्लोक · 16.1
श्री भगवानुवाचअभयं सत्त्वसंशुद्धिः ज्ञानयोगव्यवस्थितिः । दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् ॥
श्रीभगवान् बोले भयका सर्वथा अभाव अन्तःकरणकी शुद्धि ज्ञानके लिये योगमें दृढ़ स्थिति सात्त्विक दान इन्द्रियोंका दमन यज्ञ स्वाध्याय कर्तव्यपालनके लिये कष्ट सहना शरीरमनवाणीकी सरलता ॥
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