अध्याय 16 · दैवी और आसुरी संपदा का योग

दैवासुर संपद् विभाग योग

दो प्रकृतियाँ — दैवी और आसुरी। ये दूर के पात्र नहीं — हर मनुष्य के भीतर की प्रवृत्तियाँ हैं।

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Krishna on divine and demoniac qualities — the two natures

श्लोक