गुणत्रय विभाग योग
प्रकृति के तीन गुण: सत्त्व, रजस्, तमस्। हर उत्पन्न होने वाली वस्तु इन्हीं से बुनी।
सभी 27 श्लोक नीचे।
Wisdom translation, edited by Ankur Shukla. Commentary AI-drafted, human-reviewed. Reviewed June 2026. Methodology →

“श्रीभगवान् बोले सम्पूर्ण ज्ञानोंमें उत्तम और पर ज्ञानको मैं फिर कहूँगा, जिसको जानकर सबकेसब मुनिलोग इस संसारसे मुक्त होकर परमसिद्धिको प्राप्त हो गये हैं ॥”पूरा श्लोक 14.1 पढ़ें →सभी श्लोक
- 14.1अ. 14
Some knowledge does not inform you; it completes you.
श्रीभगवान् बोले सम्पूर्ण ज्ञानोंमें उत्तम और पर ज्ञानको मैं फिर कहूँगा, जिसको जानकर सबकेसब मुनिलोग इस संसारसे मुक्त होक…
- 14.2अ. 14
True understanding makes beginning and ending stop ruling you.
इस ज्ञानका आश्रय लेकर जो मनुष्य मेरी सधर्मताको प्राप्त हो गये हैं, वे महासर्गमें भी पैदा नहीं होते और महाप्रलयमें भी व्य…
- 14.3अ. 14
All birth comes from a source beyond personal control.
हे भरतवंशोद्भव अर्जुन मेरी मूल प्रकृति तो उत्पत्तिस्थान है और मैं उसमें जीवरूप गर्भका स्थापन करता हूँ । उससे सम्पूर्ण …
- 14.4अ. 14
All forms arise from one source, and the divine gives them life.
हे कुन्तीनन्दन सम्पूर्ण योनियोंमें प्राणियोंके जितने शरीर पैदा होते हैं, उन सबकी मूल प्रकृति तो माता है और मैं बीजस्थाप…
- 14.5अ. 14
Nature's three forces keep the changeless one identified with the body.
हे महाबाहो प्रकृतिसे उत्पन्न होनेवाले सत्त्व, रज और तम ये तीनों गुण अविनाशी देहीको देहमें बाँध देते हैं ॥
- 14.6अ. 14
Even clarity becomes bondage when you cling to its pleasure.
हे पापरहित अर्जुन उन गुणोंमें सत्त्वगुण निर्मल स्वच्छ होनेके कारण प्रकाशक और निर्विकार है । वह सुख और ज्ञानकी आसक्तिसे…
- 14.7अ. 14
Craving turns action into a chain.
हे कुन्तीनन्दन तृष्णा और आसक्तिको पैदा करनेवाले रजोगुणको तुम रागस्वरूप समझो । वह कर्मोंकी आसक्तिसे शरीरधारीको बाँधता ह…
- 14.8अ. 14
Confusion binds most through laziness, not force.
हे भरतवंशी अर्जुन सम्पूर्ण देहधारियोंको मोहित करनेवाले तमोगुणको तुम अज्ञानसे उत्पन्न होनेवाला समझो । वह प्रमाद, आलस्य …
- 14.9अ. 14
Each force traps you in a different way: comfort, activity, or blindness.
हे भरतवंशोद्भव अर्जुन सत्त्वगुण सुखमें और रजोगुण कर्ममें लगाकर मनुष्यपर विजय करता है तथा तमोगुण ज्ञानको ढककर एवं प्रमाद…
- 14.10अ. 14
What dominates the mind is temporary, not who you are.
हे भरतवंशोद्भव अर्जुन रजोगुण और तमोगुणको दबाकर सत्त्वगुण सत्त्वगुण, और तमोगुणको दबाकर रजोगुण, वैसे ही सत्त्वगुण और रजोग…
- 14.11अ. 14
Inner brightness is the sign that clarity is taking over.
जब इस मनुष्यशरीरमें सब द्वारोंइन्द्रियों और अन्तःकरण में प्रकाश स्वच्छता और ज्ञान विवेक प्रकट हो जाता है, तब जानना चाहिय…
- 14.12अ. 14
Restless wanting multiplies action, but never settles the mind.
हे भरतवंशमें श्रेष्ठ अर्जुन रजोगुणके बढ़नेपर लोभ, प्रवृत्ति, कर्मोंका आरम्भ, अशान्ति और स्पृहा ये वृत्तियाँ पैदा होती …
- 14.13अ. 14
Darkness does not stay still; it breeds neglect and confusion.
हे कुरुनन्दन तमोगुणके बढ़नेपर अप्रकाश, अप्रवृत्ति, प्रमाद और मोह ये वृत्तियाँ भी पैदा होती हैं ॥
- 14.14अ. 14
A clear state carries consciousness toward a clearer destination.
जिस समय सत्त्वगुण बढ़ा हो, उस समय यदि देहधारी मनुष्य मर जाता है, तो वह,उत्तमवेत्ताओंके निर्मल लोकोंमें जाता है ॥
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- 14.15अ. 14
Your strongest tendency decides the shape of your next beginning.
रजोगुणके बढ़नेपर मरनेवाला प्राणी मनुष्ययोनिमें जन्म लेता है तथा तमोगुणके बढ़नेपर मरनेवाला मूढ़योनियोंमें जन्म लेता है ॥
- 14.16अ. 14
Action carries its own flavor of result.
विवेकी पुरुषोंने शुभकर्मका तो सात्त्विक निर्मल फल कहा है, राजस कर्मका फल दुःख कहा है और तामस कर्मका फल अज्ञान मूढ़ता कहा…
- 14.17अ. 14
Your mental weather has causes: clarity, craving, and confusion each grow from different qualities.
सत्त्वगुणसे ज्ञान और रजोगुणसे लोभ आदि ही उत्पन्न होते हैं तमोगुणसे प्रमाद, मोह एवं अज्ञान भी उत्पन्न होता है ॥
- 14.18अ. 14
Your inner quality decides the direction of your life.
सत्त्वगुणमें स्थित मनुष्य ऊर्ध्वलोकोंमें जाते हैं, रजोगुणमें स्थित मनुष्य मृत्युलोकमें जन्म लेते हैं और निन्दनीय तमोगुणक…
- 14.19अ. 14
Freedom begins when you stop mistaking qualities for a personal doer.
जब विवेकी विचारकुशल मनुष्य तीनों गुणोंके सिवाय अन्य किसीको कर्ता नहीं देखता और अपनेको गुणोंसे पर अनुभव करता है, तब वह मे…
- 14.20अ. 14
Freedom begins when the three qualities no longer define you.
देहधारी विवेकी मनुष्य देहको उत्पन्न करनेवाले इन तीनों गुणोंका अतिक्रमण करके जन्म, मृत्यु और वृद्धावस्थारूप दुःखोंसे रहित…
- 14.21अ. 14
Real freedom must be visible, livable, and learnable.
अर्जुन बोले हे प्रभो इन तीनों गुणोंसे अतीत हुआ मनुष्य किन लक्षणोंसे युक्त होता है उसके आचरण कैसे होते हैं और इन तीनों …
- 14.22अ. 14
Freedom begins when changing states stop controlling your response.
श्रीभगवान् बोले हे पाण्डव प्रकाश, प्रवृत्ति तथा मोह ये सभी अच्छी तरहसे प्रवृत्त हो जायँ तो भी गुणातीत मनुष्य इनसे द्व…
- 14.23अ. 14
Freedom begins when movement happens, but identity does not.
जो उदासीनकी तरह स्थित है और जो गुणोंके द्वारा विचलित नहीं किया जा सकता तथा गुण ही गुणोंमें बरत रहे हैं इस भावसे जो अपने…
- 14.24अ. 14
Steadiness means nothing external gets to decide your center.
जो धीर मनुष्य सुखदुःखमें सम तथा अपने स्वरूपमें स्थित रहता है जो मिट्टीके ढेले, पत्थर और सोनेमें सम रहता है जो प्रियअप्रि…
- 14.25अ. 14
Freedom begins when praise, blame, and personal impulse lose their power over you.
जो धीर मनुष्य सुखदुःखमें सम तथा अपने स्वरूपमें स्थित रहता है जो मिट्टीके ढेले, पत्थर और सोनेमें सम रहता है जो प्रियअप्रि…
- 14.26अ. 14
Steady devotion can carry you beyond the forces that shape ordinary life.
जो मनुष्य अव्यभिचारी भक्तियोगके द्वारा मेरा सेवन करता है, वह इन गुणोंका अतिक्रमण करके ब्रह्मप्राप्तिका पात्र हो जाता है …
- 14.27अ. 14
All ultimate freedom rests in Krishna, not apart from him.
क्योंकि ब्रह्म, अविनाशी अमृत, शाश्वत धर्म और ऐकान्तिक सुखका आश्रय मैं ही हूँ ॥