क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग
क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ। शरीर, संसार, और दोनों को देखती चेतना। आत्म-विचार यहीं से।
सभी 35 श्लोक नीचे।
Wisdom translation, edited by Ankur Shukla. Commentary AI-drafted, human-reviewed. Reviewed June 2026. Methodology →

“श्रीभगवान् बोलेहे कुन्तीपुत्र अर्जुन यहरूपसे कहे जानेवाले शरीरको क्षेत्र कहते हैं और इस क्षेत्रको जो जानता है, उसको ज्ञानीलोग क्षेत्रज्ञ नामसे कहते हैं ॥”पूरा श्लोक 13.1 पढ़ें →सभी श्लोक
- 13.1अ. 13
Real knowing starts by separating the seen from the seer.
श्रीभगवान् बोलेहे कुन्तीपुत्र अर्जुन यहरूपसे कहे जानेवाले शरीरको क्षेत्र कहते हैं और इस क्षेत्रको जो जानता है, उसको ज्ञ…
- 13.2अ. 13
The body is observed; the knower is something else.
श्रीभगवान् बोले हे कुन्तीपुत्र अर्जुन यह रूपसे कहे जानेवाले शरीरको क्षेत्र कहते हैं और इस क्षेत्रको जो जानता है, उसको…
- 13.3अ. 13
Knowing the field is incomplete without knowing the knower.
हे भरतवंशोद्भव अर्जुन तू सम्पूर्ण क्षेत्रोंमें क्षेत्रज्ञ मेरेको ही समझ और क्षेत्रक्षेत्रज्ञका जो ज्ञान है, वही मेरे मत…
- 13.4अ. 13
Clear seeing begins by separating the field from the one who knows it.
वह क्षेत्र जो है, जैसा है, जिन विकारोंवाला है और जिससे जो पैदा हुआ है तथा वह क्षेत्रज्ञ भी जो है और जिस प्रभाववाला है, व…
- 13.5अ. 13
Ancient sources converge on one disciplined way of seeing.
यह क्षेत्रक्षेत्रज्ञका तत्त्व ऋषियोंके द्वारा बहुत विस्तारसे कहा गया है तथा वेदोंकी ऋचाओंद्वारा बहुत प्रकारसे कहा गया है…
- 13.6अ. 13
What you call “me” is a changing system, not a single thing.
मूल प्रकृति, समष्टि बुद्धि महत्तत्त्व, समष्टि अहंकार, पाँच महाभूत और दस इन्द्रियाँ, एक मन तथा पाँचों इन्द्रियोंके पाँच व…
- 13.7अ. 13
Your reactions belong to the field, not to the knower.
इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख, संघात, चेतना प्राणशक्ति और धृति इन विकारोंसहित यह क्षेत्र संक्षेपसे कहा गया है ॥
- 13.8अ. 13
True strength is quiet discipline, not self-display.
मानित्वअपनेमें श्रेष्ठताके भाव का न होना, दम्भित्वदिखावटीपन का न होना, अहिंसा, क्षमा, सरलता, गुरुकी सेवा, बाहरभीतरकी शुद…
- 13.9अ. 13
Freedom begins when desire stops dressing suffering as reward.
इन्द्रियोंके विषयोंमें वैराग्यका होना, अहंकारका भी न होना और जन्म, मृत्यु, वृद्धावस्था तथा व्याधियोंमें दुःखरूप दोषोंको …
- 13.10अ. 13
Clinging fades; the mind stays level.
आसक्तिरहित होना पुत्र, स्त्री, घर आदिमें एकात्मता घनिष्ठ सम्बन्ध न होना और अनुकूलताप्रतिकूलताकी प्राप्तिमें चित्तका नित्…
- 13.11अ. 13
True devotion stays with one center and loses interest in the crowd.
मेरेमें अनन्ययोगके द्वारा अव्यभिचारिणी भक्तिका होना, एकान्त स्थानमें रहनेका स्वभाव होना और जनसमुदायमें प्रीतिका न होना ॥
- 13.12अ. 13
Knowledge is seeing reality steadily; everything else is confusion.
अध्यात्मज्ञानमें नित्यनिरन्तर रहना, तत्त्वज्ञानके अर्थरूप परमात्माको सब जगह देखना यह पूर्वोक्त साधनसमुदाय तो ज्ञान है औ…
- 13.13अ. 13
The highest reality frees you precisely because it outgrows every label.
जो ज्ञेय है, उसपरमात्मतत्त्व को मैं अच्छी तरहसे कहूँगा, जिसको जानकर मनुष्य अमरताका अनुभव कर लेता है । वह ज्ञेयतत्त्व अन…
- 13.14अ. 13
What seems separate is already filled with the supreme reality.
वे परमात्मा सब जगह हाथों और पैरोंवाले, सब जगह नेत्रों, सिरों और मुखोंवाले तथा सब जगह कानोंवाले हैं । वे संसारमें सबको व…
- 13.15अ. 13
What sustains everything is beyond the senses that perceive it.
वे परमात्मा सम्पूर्ण इन्द्रियोंसे रहित हैं और सम्पूर्ण इन्द्रियोंके विषयोंको प्रकाशित करनेवाले हैं आसक्तिरहित हैं और सम्…
- 13.16अ. 13
What seems distant is already within everything.
वे परमात्मा सम्पूर्ण प्राणियोंके बाहरभीतर परिपूर्ण हैं और चरअचर प्राणियोंके रूपमें भी वे ही हैं एवं दूरसेदूर तथा नजदीकसे…
- 13.17अ. 13
Separation is only appearance; the many are held by one.
वे परमात्मा स्वयं विभागरहित होते हुए भी सम्पूर्ण प्राणियोंमें विभक्तकी तरह स्थित हैं । वे जाननेयोग्य परमात्मा ही सम्पूर…
- 13.18अ. 13
What illumines everything is already nearest to you.
वह परमात्मा सम्पूर्ण ज्योतियोंका भी ज्योति और अज्ञानसे अत्यन्त परे कहा गया है । वह ज्ञानस्वरूप, जाननेयोग्य, ज्ञानसाधनसम…
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- 13.19अ. 13
Clear understanding becomes transformation when devotion receives it.
इस प्रकार क्षेत्र, ज्ञान और ज्ञेयको संक्षेपसे कहा गया । मेरा भक्त इसको तत्त्वसे जानकर मेरे भावको प्राप्त हो जाता है ॥
- 13.20अ. 13
Change belongs to nature; awareness is not caught in it.
प्रकृति और पुरुष दोनोंको ही तुम अनादि समझो और विकारों तथा गुणोंको भी प्रकृतिसे ही उत्पन्न समझो । कार्य और करणके द्वारा…
- 13.21अ. 13
Action belongs to nature; experience belongs to the one who knows.
प्रकृति और पुरुष दोनोंको ही तुम अनादि समझो और विकारों तथा गुणोंको भी प्रकृतिसे ही उत्पन्न समझो । कार्य और करणके द्वारा…
- 13.22अ. 13
Attachment to changing qualities keeps the cycle of birth going.
प्रकृतिमें स्थित पुरुष ही प्रकृतिजन्य गुणोंका भोक्ता बनता है और गुणोंका सङ्ग ही उसके ऊँचनीच योनियोंमें जन्म लेनेका कारण …
- 13.23अ. 13
Identity is borrowed from the body; the true self stands beyond it.
यह पुरुष प्रकृतिशरीर के साथ सम्बन्ध रखनेसे उपद्रष्टा, उसके साथ मिलकर सम्मति, अनुमति देनेसे अनुमन्ता, अपनेको उसका भरणपोषण…
- 13.24अ. 13
Clear seeing frees you while life still continues.
इस प्रकार पुरुषको और गुणोंके सहित प्रकृतिको जो मनुष्य अलगअलग जानता है, वह सब तरहका बर्ताव करता हुआ भी फिर जन्म नहीं लेता…
- 13.25अ. 13
The same realization opens through different disciplines.
कई मनुष्य ध्यानयोगके द्वारा, कई सांख्ययोगके द्वारा और कई कर्मयोगके द्वारा अपनेआपसे अपनेआपमें परमात्मतत्त्वका अनुभव करते …
- 13.26अ. 13
Devoted listening can carry a person beyond fear and mortality.
दूसरे मनुष्य इस प्रकार ध्यानयोग, सांख्ययोग, कर्मयोग, आदि साधनोंको नहीं जानते, केवल जीवन्मुक्त महापुरुषोंसे सुनकर उपासना …
- 13.27अ. 13
All forms arise from the meeting of awareness and changing nature.
हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन स्थावर और जंगम जितने भी प्राणी पैदा होते हैं, उनको तुम क्षेत्र और क्षेत्रज्ञके संयोगसे …
- 13.28अ. 13
Real seeing notices one imperishable presence in every changing form.
जो नष्ट होते हुए सम्पूर्ण प्राणियोंमें परमात्माको नाशरहित और समरूपसे स्थित देखता है, वही वास्तवमें सही देखता है ॥
- 13.29अ. 13
Seeing unity everywhere ends the violence that returns to yourself.
क्योंकि सब जगह समरूपसे स्थित ईश्वरको समरूपसे देखनेवाला मनुष्य अपनेआपसे अपनी हिंसा नहीं करता, इसलिये वह परमगतिको प्राप्त …
- 13.30अ. 13
Freedom begins when you stop claiming every action as yours.
जो सम्पूर्ण क्रियाओंको सब प्रकारसे प्रकृतिके द्वारा ही की जाती हुई देखता है और अपनेआपको अकर्ता देखता अनुभव करता है, वही …
- 13.31अ. 13
Many beings are one reality seen through different forms.
जिस कालमें साधक प्राणियोंके अलगअलग भावोंको एक प्रकृतिमें ही स्थित देखता है और उस प्रकृतिसे ही उन सबका विस्तार देखता है, …
- 13.32अ. 13
What you are remains unstained, even while life moves through you.
हे कुन्तीनन्दन यह पुरुष स्वयं अनादि और गुणोंसे रहित होनेसे अविनाशी परमात्मस्वरूप ही है । यह शरीरमें रहता हुआ भी न करता…
- 13.33अ. 13
What is everywhere cannot be stained by what changes.
जैसे सब जगह व्याप्त आकाश अत्यन्त सूक्ष्म होनेसे कहीं भी लिप्त नहीं होता, ऐसे ही सब जगह परिपूर्ण आत्मा किसी भी देहमें लिप…
- 13.34अ. 13
Awareness illuminates everything without being touched by what it sees.
हे भरतवंशोद्भव अर्जुन जैसे एक ही सूर्य सम्पूर्ण संसारको प्रकाशित करता है, ऐसे ही क्षेत्री क्षेत्रज्ञ, आत्मा सम्पूर्ण क्…
- 13.35अ. 13
Clear seeing separates you from what changes and opens the way beyond it.
इस प्रकार जो ज्ञानरूपी नेत्रसे क्षेत्र और क्षेत्रज्ञके अन्तरविभाग को तथा कार्यकारणसहित प्रकृतिसे स्वयंको अलग जानते हैं, …