क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग · श्लोक 26

भगवद् गीता 13.26

Devoted listening can carry a person beyond fear and mortality.

अन्ये त्वेवमजानन्तः श्रुत्वाऽन्येभ्य उपासते । तेऽपि चातितरन्त्येव मृत्युं श्रुतिपरायणाः ॥
हिन्दी अनुवाद
दूसरे मनुष्य इस प्रकार ध्यानयोग, सांख्ययोग, कर्मयोग, आदि साधनोंको नहीं जानते, केवल जीवन्मुक्त महापुरुषोंसे सुनकर उपासना करते हैं, ऐसे वे सुननेके परायण मनुष्य भी मृत्युको तर जाते हैं ॥
English
Others do not know these paths, but they worship by hearing from others. Even they cross beyond death if they listen with devotion.
विषय:shrutiupasanashraddha
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