भगवद् गीता में Moksha
मोक्ष गीता का शब्द है मुक्ति के लिए — संसार से पलायन नहीं, उसमें स्वतंत्रता। जब भ्रांति मिटती है, जो शेष रहता है वही मोक्ष है। ये वे श्लोक हैं जहाँ कृष्ण उस लक्ष्य का नाम लेते हैं जिसके लिए सारी शिक्षा है।
स्थित्वाऽस्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति ॥
त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ॥
तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ॥
- 4.32अ. 4
Seeing every offering as action frees you from action’s binding force.
इस प्रकार और भी बहुत तरहके यज्ञ वेदकी वाणीमें विस्तारसे कहे गये हैं । उन सब यज्ञोंको तू कर्मजन्य जान । इस प्रकार जानकर
- 5.5अ. 5
Different paths can lead to the same freedom.
सांख्ययोगियोंके द्वारा जो तत्त्व प्राप्त किया जाता है, कर्मयोगियोंके द्वारा भी वही प्राप्त किया जाता है । अतः जो मनुष्य
- 5.17अ. 5
Complete alignment with the supreme reality ends the cycle of return.
जिनकी बुद्धि तदाकार हो रही है, जिनका मन तदाकार हो रहा है, जिनकी स्थिति परमात्मतत्वमें है, ऐसे परमात्मपरायण साधक ज्ञानके
- 5.28अ. 5
Freedom begins where desire, fear, and anger lose authority.
बाह्य पदार्थोंको बाहर ही छोड़कर और नेत्रोंकी दृष्टिको भौंहोंके बीचमें स्थित करके तथा नासिकामें विचरनेवाले प्राण और अपान
- 7.29अ. 7
Refuge in the divine opens total understanding of reality, inner life, and action.
जरा वृद्धावस्था और मरण मृत्यु से मोक्ष पानेके लिये जो मेरा आश्रय लेकर प्रयत्न करते हैं, वे उस ब्रह्मको, सम्पूर्ण अध्यात्
- 8.6अ. 8
The end follows the state you have trained.
हे कुन्तीपुत्र अर्जुन मनुष्य अन्तकाल में जिसजिस भी भावका स्मरण करते हुए शरीर छोड़ता है वह उस अन्तकालके भावसे सदा भावित
- 8.11अ. 8
The imperishable is reached by giving up desire, not by feeding it.
वेदवेत्ता लोग जिसको अक्षर कहते हैं, वीतराग यति जिसको प्राप्त करते हैं और साधक जिसकी प्राप्तिकी इच्छा करते हुए ब्रह्मचर्य
- 8.13अ. 8
Final remembrance can carry consciousness beyond the body.
इन्द्रियोंके सम्पूर्ण द्वारोंको रोककर मनका हृदयमें निरोध करके और अपने प्राणोंको मस्तकमें स्थापित करके योगधारणामें सम्यक्
- 8.15अ. 8
True arrival ends the need to come back.
महात्मालोग मुझे प्राप्त करके दुःखालय और अशाश्वत पुनर्जन्मको प्राप्त नहीं होते क्योंकि वे परमसिद्धिको प्राप्त हो गये हैं
- 8.16अ. 8
Even the highest attainments return, but union with Krishna does not.
हे अर्जुन ब्रह्मलोकतक सभी लोक पुनरावर्ती है परन्तु हे कौन्तेय मुझे प्राप्त होनेपर पुनर्जन्म नहीं होता ॥
- 8.21अ. 8
The highest arrival is beyond return.
उसीको अव्यक्त और अक्षर कहा गया है और उसीको परमगति कहा गया है तथा जिसको प्राप्त होनेपर जीव फिर लौटकर नहीं आते, वह मेरा पर
- 8.23अ. 8
Not every departure leads the same way; some paths return you, others do not.
हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन जिस काल अर्थात् मार्गमें शरीर छोड़कर गये हुए योगी अनावृत्तिको प्राप्त होते हैं अर्थात्
- 8.24अ. 8
The final passage opens for those who know the supreme reality.
जिस मार्गमें प्रकाशस्वरूप अग्निका अधिपति देवता, दिनका अधिपति देवता, शुक्लपक्षका अधिपति देवता, और छः महीनोंवाले उत्तरायणक
- 8.26अ. 8
Some choices free you from the cycle; others send you back into it.
क्योंकि शुक्ल और कृष्ण ये दोनों गतियाँ अनादिकालसे जगत्प्राणिमात्र के साथ सम्बन्ध रखनेवाली मानी गई हैं । इनमेंसे एक गति
- 8.28अ. 8
Knowing the way beyond rewards leads to the highest home.
योगी इसको शुक्ल और कृष्णमार्गके रहस्यको जानकर वेदोंमें, यज्ञोंमें, तपोंमें तथा दानमें जोजो पुण्यफल कहे गये हैं, उन सभी प
- 9.1अ. 9
The deepest truth frees only a heart that does not resist it.
श्रीभगवान् बोले यह अत्यन्त गोपनीय विज्ञानसहित ज्ञान दोषदृष्टिरहित तेरे लिये तो मैं फिर अच्छी तरहसे कहूँगा, जिसको जानकर
- 13.26अ. 13
Devoted listening can carry a person beyond fear and mortality.
दूसरे मनुष्य इस प्रकार ध्यानयोग, सांख्ययोग, कर्मयोग, आदि साधनोंको नहीं जानते, केवल जीवन्मुक्त महापुरुषोंसे सुनकर उपासना
- 13.35अ. 13
Clear seeing separates you from what changes and opens the way beyond it.
इस प्रकार जो ज्ञानरूपी नेत्रसे क्षेत्र और क्षेत्रज्ञके अन्तरविभाग को तथा कार्यकारणसहित प्रकृतिसे स्वयंको अलग जानते हैं,
- 14.19अ. 14
Freedom begins when you stop mistaking qualities for a personal doer.
जब विवेकी विचारकुशल मनुष्य तीनों गुणोंके सिवाय अन्य किसीको कर्ता नहीं देखता और अपनेको गुणोंसे पर अनुभव करता है, तब वह मे
- 14.20अ. 14
Freedom begins when the three qualities no longer define you.
देहधारी विवेकी मनुष्य देहको उत्पन्न करनेवाले इन तीनों गुणोंका अतिक्रमण करके जन्म, मृत्यु और वृद्धावस्थारूप दुःखोंसे रहित
- 14.27अ. 14
All ultimate freedom rests in Krishna, not apart from him.
क्योंकि ब्रह्म, अविनाशी अमृत, शाश्वत धर्म और ऐकान्तिक सुखका आश्रय मैं ही हूँ ॥
- 15.4अ. 15
The final refuge is a state where return itself stops.
उसके बाद उस परमपदपरमात्मा की खोज करनी चाहिये जिसको प्राप्त होनेपर मनुष्य फिर लौटकर संसारमें नहीं आते और जिससे अनादिकालसे
- 15.5अ. 15
Freedom begins when pride, craving, and inner division fall away.
जो मान और मोहसे रहित हो गये हैं, जिन्होंने आसक्तिसे होनेवाले दोषोंको जीत लिया है, जो नित्यनिरन्तर परमात्मामें ही लगे हुए
- 15.19अ. 15
Clear seeing of the Supreme Self becomes total devotion.
हे भरतवंशी अर्जुन इस प्रकार जो मोहरहित मनुष्य मुझे पुरुषोत्तम जानता है, वह सर्वज्ञ सब प्रकारसे मेरा ही भजन करता है ॥
- 15.20अ. 15
Secret knowledge makes a person complete.
हे निष्पाप अर्जुन इस प्रकार यह अत्यन्त गोपनीय शास्त्र मेरे द्वारा कहा गया है । हे भरतवंशी अर्जुन इसको जानकर मनुष्य ज्
- 17.25अ. 17
Freedom deepens when action stops demanding a private return.
तत् नामसे कहे जानेवाले परमात्माके लिये ही सब कुछ है ऐसा मानकर मुक्ति चाहनेवाले मनुष्योंद्वारा फलकी इच्छासे रहित होकर अन
- 18.17अ. 18
Without egoic ownership, action leaves no stain.
जिसका अहंकृतभाव नहीं है और जिसकी बुद्धि लिप्त नहीं होती, वह इन सम्पूर्ण प्राणियोंको मारकर भी न मारता है और न बँधता है ॥
- 18.49अ. 18
Freedom arrives when the mind stops reaching outward.
जिसकी बुद्धि सब जगह आसक्तिरहित है, जिसने शरीरको वशमें कर रखा है, जो स्पृहारहित है, वह मनुष्य सांख्ययोगके द्वारा नैष्कर्म
- 18.50अ. 18
Knowledge has a highest point: direct arrival, not endless thinking.
हे कौन्तेय सिद्धिअन्तःकरणकी शुद्धि को प्राप्त हुआ साधक ब्रह्मको, जो कि ज्ञानकी परा निष्ठा है, जिस प्रकारसे प्राप्त होता
- 18.66अ. 18
Total refuge ends the burden of fear.
सम्पूर्ण धर्मोंका आश्रय छोड़कर तू केवल मेरी शरणमें आ जा । मैं तुझे सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त कर दूँगा, चिन्ता मत कर ॥
- 18.71अ. 18
Trustful listening can open the door to freedom.
श्रद्धावान् और दोषदृष्टिसे रहित जो मनुष्य इस गीताग्रन्थको सुन भी लेगा, वह भी सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त होकर पुण्यकारियोंके