भक्ति योग
भक्ति का मार्ग। कृष्ण कहते हैं: सबसे प्रिय, सबसे सुगम।
सभी 20 श्लोक नीचे।
Wisdom translation, edited by Ankur Shukla. Commentary AI-drafted, human-reviewed. Reviewed June 2026. Methodology →

“जो भक्त इस प्रकार निरन्तर आपमें लगे रहकर आपसगुण भगवान् की उपासना करते हैं और जो अविनाशी निराकारकी ही उपासना करते हैं, उनमेंसे उत्तम योगवेत्ता कौन हैं ॥”पूरा श्लोक 12.1 पढ़ें →सभी श्लोक
- 12.1अ. 12
Devotion can face the divine as form or as formless reality.
जो भक्त इस प्रकार निरन्तर आपमें लगे रहकर आपसगुण भगवान् की उपासना करते हैं और जो अविनाशी निराकारकी ही उपासना करते हैं, उन…
- 12.2अ. 12
Full trust and steady remembrance make devotion complete.
मेरेमें मनको लगाकर नित्यनिरन्तर मेरेमें लगे हुए जो भक्त परम श्रद्धासे युक्त होकर मेरी उपासना करते हैं, वे मेरे मतमें सर्…
- 12.3अ. 12
The deepest devotion reaches what never changes.
जो अपनी इन्द्रियोंको वशमें करके अचिन्त्य, सब जगह परिपूर्ण, अनिर्देश्य, कूटस्थ, अचल, ध्रुव, अक्षर और अव्यक्तकी उपासना करत…
- 12.4अ. 12
Reach the divine by mastering yourself and caring for everyone.
जो अपनी इन्द्रियोंको वशमें करके अचिन्त्य, सब जगह परिपूर्ण, अनिर्देश्य, कूटस्थ, अचल, ध्रुव, अक्षर और अव्यक्तकी उपासना करत…
- 12.5अ. 12
The subtlest path is hardest for a body-bound mind.
अव्यक्तमें आसक्त चित्तवाले उन साधकोंको अपने साधनमें कष्ट अधिक होता है क्योंकि देहाभिमानियोंके द्वारा अव्यक्तविषयक गति कठ…
- 12.6अ. 12
Total devotion turns every action into worship.
परन्तु जो कर्मोंको मेरे अर्पण करके और मेरे परायण होकर अनन्ययोगसे मेरा ही ध्यान करते हुए मेरी उपासना करते हैं ॥
- 12.7अ. 12
A mind fixed on Krishna is met by Krishna's saving presence.
हे पार्थ मेरेमें आविष्ट चित्तवाले उन भक्तोंका मैं मृत्युरूप संसारसमुद्रसे शीघ्र ही उद्धार करनेवाला बन जाता हूँ ॥
- 12.8अ. 12
A divided mind settles when both thought and feeling rest in the divine.
तू मेरेमें मनको लगा और मेरेमें ही बुद्धिको लगा इसके बाद तू मेरेमें ही निवास करेगा इसमें संशय नहीं है ॥
- 12.9अ. 12
Practice can lead the mind where stillness cannot yet go.
अगर तू मनको मेरेमें अचलभावसे स्थिर अर्पण करनेमें समर्थ नहीं है, तो हे धनञ्जय अभ्यासयोगके द्वारा तू मेरी प्राप्तिकी इच्छ…
- 12.10अ. 12
Offered action can succeed where practice still fails.
अगर तू अभ्यासयोग में भी असमर्थ है, तो मेरे लिये कर्म करनेके परायण हो जा । मेरे लिये कर्मोंको करता हुआ भी तू सिद्धिको प्…
Did you like this chapter?
- 12.11अ. 12
Let go of the result; the action itself is the practice.
अगर मेरे योगसमता के आश्रित हुआ तू इसपूर्वश्लोकमें कहे गये साधन को भी करनेमें असमर्थ है, तो मनइन्द्रियोंको वशमें करके सम्…
- 12.12अ. 12
Peace begins when you stop clinging to what your action produces.
अभ्याससे शास्त्रज्ञान श्रेष्ठ है, शास्त्रज्ञानसे ध्यान श्रेष्ठ है और ध्यानसे भी सब कर्मोंके फलका त्याग श्रेष्ठ है । कर्…
- 12.13अ. 12
Devotion shows up as friendliness, forgiveness, and emotional steadiness.
सब प्राणियोंमें द्वेषभावसे रहित, सबका मित्र प्रेमी और दयालु, ममतारहित, अहंकाररहित, सुखदुःखकी प्राप्तिमें सम, क्षमाशील, न…
- 12.14अ. 12
Real devotion is a steady mind already placed beyond itself.
सब प्राणियोंमें द्वेषभावसे रहित, सबका मित्र प्रेमी और दयालु, ममतारहित, अहंकाररहित, सुखदुःखकी प्राप्तिमें सम, क्षमाशील, न…
- 12.15अ. 12
True devotion leaves no wake of disturbance.
जिससे किसी प्राणीको उद्वेग नहीं होता और जिसको खुद भी किसी प्राणीसे उद्वेग नहीं होता तथा जो हर्ष, अमर्ष ईर्ष्या, भय और उद…
- 12.16अ. 12
True closeness releases craving, anxiety, and compulsive beginning.
जो आकाङ्क्षासे रहित, बाहरभीतरसे पवित्र, दक्ष, उदासीन, व्यथासे रहित और सभी आरम्भोंका अर्थात् नयेनये कर्मोंके आरम्भका सर्व…
- 12.17अ. 12
Devotion becomes steady when liking and disliking no longer rule the heart.
जो न कभी हर्षित होता है, न द्वेष करता है, न शोक करता है, न कामना करता है और जो शुभअशुभ कर्मोंमें रागद्वेषका त्यागी है, व…
- 12.18अ. 12
Real devotion stays even when life feels hostile or kind.
जो शत्रु और मित्रमें तथा मानअपमानमें सम है और शीतउष्ण अनुकूलताप्रतिकूलता तथा सुखदुःखमें सम है एवं आसक्तिसे रहित है, और ज…
- 12.19अ. 12
Praise and blame lose power over the one who stands steady.
जो शत्रु और मित्रमें तथा मानअपमानमें सम है और शीतउष्ण अनुकूलताप्रतिकूलता तथा सुखदुःखमें सम है एवं आसक्तिसे रहित है, और ज…
- 12.20अ. 12
Faithful practice turns devotion into closeness.
जो मेरेमें श्रद्धा रखनेवाले और मेरे परायण हुए भक्त पहले कहे हुए इस धर्ममय अमृतका अच्छी तरहसे सेवन करते हैं, वे मुझे अत्य…