भक्ति योग · श्लोक 14

भगवद् गीता 12.14

Real devotion is a steady mind already placed beyond itself.

सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः । मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः ॥
हिन्दी अनुवाद
सब प्राणियोंमें द्वेषभावसे रहित, सबका मित्र प्रेमी और दयालु, ममतारहित, अहंकाररहित, सुखदुःखकी प्राप्तिमें सम, क्षमाशील, निरन्तर सन्तुष्ट,योगी, शरीरको वशमें किये हुए, दृढ़ निश्चयवाला, मेरेमें अर्पित मनबुद्धिवाला जो मेरा भक्त है, वह मेरेको प्रिय है ॥
English
The devoted yogi is always content, self-controlled, and steady in resolve. One whose mind and discerning mind are offered to Me is dear to Me.
विषय:bhaktimanasbuddhi
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