अध्याय 11 · विश्वरूप दर्शन का योग

विश्वरूप दर्शन योग

अर्जुन देखना चाहते हैं। कृष्ण दिखाते हैं। विश्वरूप: विराट, भयावह, मुख खोले ब्रह्मांड।

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Wisdom translation, edited by Ankur Shukla. Commentary AI-drafted, human-reviewed. Reviewed June 2026. Methodology →

The Vishwarupa — Krishna's cosmic universal form
प्रथम श्लोक · 11.1
अर्जुन उवाचमदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसंज्ञितम् । यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम ॥
अर्जुन बोले केवल मेरेपर कृपा करनेके लिये ही आपने जो परम गोपनीय अध्यात्मतत्तव जाननेका वचन कहा, उससे मेरा यह मोह नष्ट हो गया है ॥
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