विश्वरूप दर्शन योग · श्लोक 42

भगवद् गीता 11.42

Familiarity can hide greatness until awe breaks through.

यच्चावहासार्थमसत्कृतोऽसिविहारशय्यासनभोजनेषु । एकोऽथवाप्यच्युत तत्समक्षंतत्क्षामये त्वामहमप्रमेयम् ॥
हिन्दी अनुवाद
आपकी महिमा और स्वरूपको न जानते हुए मेरे सखा हैं ऐसा मानकर मैंने प्रमादसे अथवा प्रेमसे भी हठपूर्वक बिना सोचेसमझे हे कृष्ण हे यादव हे सखे इस प्रकार जो कुछ कहा है और हे अच्युत हँसीदिल्लगीमें, चलतेफिरते, सोतेजागते, उठतेबैठते, खातेपीते समयमें अकेले अथवा उन सखाओं, कुटुम्बियों आदिके सामने मेरे द्वारा आपका जो कुछ तिरस्कार किया गया है, वह सब अप्रमेस्वरूप आपसे मैं क्षमा करवाता हूँ ॥
English
Whatever disrespect I showed you in jest, while walking, resting, sitting, eating, alone or before others, I ask your immeasurable forgiveness.
विषय:arjuna-prayerforgivenessvishwarupa
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