अर्जुन उवाचस्थाने हृषीकेश तव प्रकीर्त्याजगत् प्रहृष्यत्यनुरज्यते च । रक्षांसि भीतानि दिशो द्रवन्तिसर्वे नमस्यन्ति च सिद्धसङ्घाः ॥
हिन्दी अनुवाद
अर्जुन बोले हे अन्तर्यामी भगवन् आपके नाम, गुण, लीलाका कीर्तन करनेसे यह सम्पूर्ण जगत् हर्षित हो रहा है और अनुरागप्रेम को प्राप्त हो रहा है । आपके नाम, गुण आदिके कीर्तनसे भयभीत होकर राक्षसलोग दसों दिशाओंमें भागते हुए जा रहे हैं और सम्पूर्ण सिद्धगण आपको नमस्कार कर रहे हैं । यह सब होना उचित ही है ॥
English
Arjuna said: O Hrishikesha, by chanting Your names and glories, the whole world rejoices and becomes devoted. By that chanting, frightened beings flee in all directions, and all the perfected ones bow to You. This is only fitting.