ज्ञान विज्ञान योग
ईश्वर के दो रूप: व्यक्त और अव्यक्त। बिरले खोजते हैं, और भी बिरले समझते हैं।
सभी 30 श्लोक नीचे।
Wisdom translation, edited by Ankur Shukla. Commentary AI-drafted, human-reviewed. Reviewed June 2026. Methodology →

“श्रीभगवान् बोले हे पृथानन्दन मुझमें आसक्त मनवाला, मेरे आश्रित होकर योगका अभ्यास करता हुआ तू मेरे समग्ररूपको निःसन्देह जैसा जानेगा, उसको सुन ॥”पूरा श्लोक 7.1 पढ़ें →सभी श्लोक
- 7.1अ. 7
Refuge and practice open the way to complete knowing.
श्रीभगवान् बोले हे पृथानन्दन मुझमें आसक्त मनवाला, मेरे आश्रित होकर योगका अभ्यास करता हुआ तू मेरे समग्ररूपको निःसन्देह …
- 7.2अ. 7
Real knowing leaves no unfinished hunger for more.
तेरे लिये मैं विज्ञानसहित ज्ञान सम्पूर्णतासे कहूँगा, जिसको जाननेके बाद फिर यहाँ कुछ भी जानना बाकी नहीं रहेगा ॥
- 7.3अ. 7
True knowing is rarer than striving, even among the successful.
हजारों मनुष्योंमें कोई एक वास्तविक सिद्धिके लिये यत्न करता है और उन यत्न करनेवाले सिद्धोंमें कोई एक ही मुझे तत्त्वसे जान…
- 7.4अ. 7
What changes is not the whole of what you are.
पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश ये पञ्चमहाभूत और मन, बुद्धि तथा अहंकार यह आठ प्रकारके भेदोंवाली मेरी अपरा प्रकृति है । हे…
- 7.5अ. 7
What sustains the world is subtler than what the senses first show.
पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश ये पञ्चमहाभूत और मन, बुद्धि तथा अहंकार यह आठ प्रकारके भेदोंवाली मेरी अपरा प्रकृति है । हे…
- 7.6अ. 7
Everything that appears rises from one source and returns there.
अपरा और परा इन दोनों प्रकृतियोंके संयोगसे ही सम्पूर्ण प्राणी उत्पन्न होते हैं, ऐसा तुम समझो । मैं सम्पूर्ण जगत् का प्र…
- 7.7अ. 7
Everything is held in one sustaining reality.
हे धनञ्जय मेरे बढ़कर इस जगत् का दूसरा कोई किञ्चिन्मात्र भी कारण नहीं है । जैसे सूतकी मणियाँ सूतके धागेमें पिरोयी हुई ह…
- 7.8अ. 7
The sacred is already inside ordinary experience.
हे कुन्तीनन्दन जलोंमें रस मैं हूँ, चन्द्रमा और सूर्यमें प्रभा प्रकाश मैं हूँ, सम्पूर्ण वेदोंमें प्रणव ओंकार मैं हूँ, आक…
- 7.9अ. 7
The sacred is already inside nature, vitality, and discipline.
पृथ्वीमें पवित्र गन्ध मैं हूँ, और अग्निमें तेज मैं हूँ, तथा सम्पूर्ण प्राणियोंमें जीवनीशक्ति मैं हूँ और तपस्वियोंमें तपस…
- 7.10अ. 7
All brilliance is borrowed from the same source.
हे पृथानन्दन सम्पूर्ण प्राणियोंका अनादि बीज मुझे जान । बुद्धिमानोंमें बुद्धि और तेजस्वियोंमें तेज मैं हूँ ॥
- 7.11अ. 7
Strength becomes clean when desire no longer fights dharma.
हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन बलवालोंमें काम और रागसे रहित बल मैं हूँ । मनुषयोंमें धर्मसे अविरुद्ध धर्मयुक्त काम मैं…
- 7.12अ. 7
All qualities arise in the divine, yet the divine is not bound by any of them.
और तो क्या कहूँ जितने भी सात्त्विक, राजस और तामस भाव हैं, वे सब मुझ से ही होते हैं ऐसा समझो । पर मैं उनमें और वे मेरेम…
- 7.13अ. 7
Three qualities can hide the imperishable reality from plain sight.
किन्तु इन तीनों गुणरूप भावोंसे मोहित यह सब जगत् इन गुणोंसे अतीत अविनाशी मुझे नहीं जानता ॥
- 7.14अ. 7
The way beyond the veil is not force, but refuge.
क्योंकि मेरी यह गुणमयी दैवी माया बड़ी दुरत्यय है अर्थात् इससे पार पाना बड़ा कठिन है । जो केवल मेरे ही शरण होते हैं, वे …
- 7.15अ. 7
A corrupted mind cannot recognise what would free it.
मायाके द्वारा अपहृत ज्ञानवाले, आसुर भावका आश्रय लेनेवाले और मनुष्योंमें महान् नीच तथा पापकर्म करनेवाले मूढ़ मनुष्य मेरे …
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- 7.16अ. 7
Different needs can still lead to one real turning toward the divine.
हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुनव पवित्र कर्म करनेवाले अर्थार्थी, आर्त, जिज्ञासु और ज्ञानी अर्थात् प्रेमी ये चार प्रकार…
- 7.17अ. 7
Deep knowing and devoted love become a mutual bond.
उन चार भक्तोंमें मेरेमें निरन्तर लगा हुआ, अनन्यभक्तिवाला ज्ञानी अर्थात् प्रेमी भक्त श्रेष्ठ है क्योंकि ज्ञानी भक्तको मैं…
- 7.18अ. 7
Deep knowing turns devotion into identity.
पहले कहे हुए सबकेसब भक्त बड़े उदार श्रेष्ठ भाववाले हैं । परन्तु ज्ञानी प्रेमी तो मेरा स्वरूप ही है ऐसा मेरा मत है । क…
- 7.19अ. 7
Deep seeing ends in surrender to the one reality in all things.
बहुत जन्मोंके अन्तमें अर्थात् मनुष्यजन्ममें सब कुछ परमात्मा ही है, ऐसा जो ज्ञानवान् मेरे शरण होता है, वह महात्मा अत्यन्त…
- 7.20अ. 7
Desire clouds judgment and sends the mind toward smaller refuges.
उनउन कामनाओंसे जिनका ज्ञान अपहृत हो गया है, ऐसे वे मनुष्य अपनीअपनी प्रकृतिसे नियन्त्रित होकर देवताओंके उनउन नियमोंको धार…
- 7.21अ. 7
Faith becomes firm where the devotee turns.
जोजो भक्त जिसजिस देवताका श्रद्धापूर्वक पूजन करना चाहता है, उसउस देवताके प्रति मैं उसकी श्रद्धाको दृढ़ कर देता हूँ ॥
- 7.22अ. 7
Faith draws the result, but the deeper order grants it.
उस मेरे द्वारा दृढ़ की हुई श्रद्धासे युक्त होकर वह मनुष्य सकामभावपूर्वक उस देवताकी उपासना करता है और उसकी वह कामना पूरी …
- 7.23अ. 7
Finite worship brings finite results; devotion returns you to Krishna.
परन्तु उन अल्पबुद्धिवाले मनुष्योंको उन देवताओंकी आराधनाका फल अन्तवाला नाशवान् ही मिलता है । देवताओंका पूजन करनेवाले देव…
- 7.24अ. 7
Form can hide the imperishable reality beneath it.
बुद्धिहीन मनुष्य मेरे सर्वश्रेष्ठ अविनाशी परमभावको न जानते हुए अव्यक्त मनइन्द्रियोंसे पर मुझ सच्चिदानन्दघन परमात्माको मन…
- 7.25अ. 7
The hidden divine is missed by confused seeing, not by absence.
जो मूढ़ मनुष्य मेरेको अज और अविनाशी ठीक तरहसे नहीं जानते मानते, उन सबके सामने योगमायासे अच्छी तरहसे आवृत हुआ मैं प्रकट न…
- 7.26अ. 7
Everything is visible to the divine; the divine remains unseen to ordinary minds.
हे अर्जुन जो प्राणी भूतकालमें हो चुके हैं, तथा जो वर्तमानमें हैं और जो भविष्यमें होंगे, उन सब प्राणियोंको तो मैं जानता …
- 7.27अ. 7
Desire and aversion turn clear seeing into confusion.
हे भरतवंशमें उत्पन्न परंतप इच्छा राग और द्वेषसे उत्पन्न होनेवाले द्वन्द्वमोहसे मोहित सम्पूर्ण प्राणी संसारमें मूढ़ताको …
- 7.28अ. 7
Clear hearts stop wavering and move toward the divine with resolve.
परन्तु जिन पुण्यकर्मा मनुष्योंके पाप नष्ट गये हैं, वे द्वन्द्वमोहसे रहित हुए मनुष्य दृढ़व्रती होकर मेरा भजन करते हैं ॥
- 7.29अ. 7
Refuge in the divine opens total understanding of reality, inner life, and action.
जरा वृद्धावस्था और मरण मृत्यु से मोक्ष पानेके लिये जो मेरा आश्रय लेकर प्रयत्न करते हैं, वे उस ब्रह्मको, सम्पूर्ण अध्यात्…
- 7.30अ. 7
Complete understanding remains steady even at the moment of departure.
जो मनुष्य अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञके सहित मुझे जानते हैं, वे युक्तचेता मनुष्य अन्तकालमें भी मुझे ही जानते हैं अर्थात् प…