कर्म योग
कर्म करना ही पड़ेगा। यह चुनाव नहीं है। प्रश्न यह है कि उसमें बँधे बिना कैसे करें। कर्म योग का उत्तर यही है।
सभी 43 श्लोक नीचे।
Wisdom translation, edited by Ankur Shukla. Commentary AI-drafted, human-reviewed. Reviewed June 2026. Methodology →

“अर्जुन बोले हे जनार्दन अगर आप कर्मसे बुद्धि ज्ञान को श्रेष्ठ मानते हैं, तो फिर हे केशव मुझे घोर कर्ममें क्यों लगाते हैं आप अपने मिले हुएसे वचनोंसे मेरी बुद्धिको मोहितसी कर रहे हैं । अतः आप निश्चय करके उस एक बात को कहिये, जिससे मैं कल्याणको प्राप्त हो जाऊँ ॥”पूरा श्लोक 3.1 पढ़ें →सभी श्लोक
- 3.1अ. 3
Mixed guidance deepens paralysis; clarity must come before action.
अर्जुन बोले हे जनार्दन अगर आप कर्मसे बुद्धि ज्ञान को श्रेष्ठ मानते हैं, तो फिर हे केशव मुझे घोर कर्ममें क्यों लगाते है…
- 3.2अ. 3
Confusion ends when the mind asks for one clear direction.
अर्जुन बोले हे जनार्दन अगर आप कर्मसे बुद्धि ज्ञान को श्रेष्ठ मानते हैं, तो फिर हे केशव मुझे घोर कर्ममें क्यों लगाते हैं…
- 3.3अ. 3
Different natures are steadied by different disciplines.
श्रीभगवान् बोले हे निष्पाप अर्जुन इस मनुष्यलोकमें दो प्रकारसे होनेवाली निष्ठा मेरे द्वारा पहले कही गयी है । उनमें ज्ञा…
- 3.4अ. 3
Freedom is not found by escaping action, but by changing your relation to it.
मनुष्य न तो कर्मोंका आरम्भ किये बिना निष्कर्मताको प्राप्त होता है और न कर्मोंके त्यागमात्रसे सिद्धिको ही प्राप्त होता है…
- 3.5अ. 3
Inaction is an illusion; nature is already moving you.
कोई भी मनुष्य किसी भी अवस्थामें क्षणमात्र भी कर्म किये बिना नहीं रह सकता क्योंकि प्रकृतिके परवश हुए सब प्राणियोंसे प्रकृ…
- 3.6अ. 3
Outer restraint means nothing if the mind still feeds desire.
जो कर्मेन्द्रियों सम्पूर्ण इन्द्रियों को हठपूर्वक रोककर मनसे इन्द्रियोंके विषयोंका चिन्तन करता रहता है, वह मूढ़ बुद्धिवा…
- 3.7अ. 3
Self-mastery makes action noble, not the outer task alone.
हे अर्जुन जो मनुष्य मनसे इन्द्रियोंपर नियन्त्रण करके आसक्तिरहित होकर निष्काम भावसे समस्त इन्द्रियोंके द्वारा कर्मयोगका आ…
- 3.8अ. 3
Right action is unavoidable; even survival depends on it.
तू शास्त्रविधिसे नियत किये हुए कर्तव्यकर्म कर क्योंकि कर्म न करनेकी अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है तथा कर्म न करनेसे तेरा …
- 3.9अ. 3
Work becomes bondage when it is done for yourself.
यज्ञ कर्तव्यपालन के लिये किये जानेवाले कर्मोंसे अन्यत्र अपने लिये किये जानेवाले कर्मोंमें लगा हुआ यह मनुष्यसमुदाय कर्मों…
- 3.10अ. 3
Life flourishes when duty becomes mutual support.
प्रजापति ब्रह्माजीने सृष्टिके आदिकालमें कर्तव्यकर्मोंके विधानसहित प्रजामनुष्य आदि की रचना करके उनसे प्रधानतया मनुष्योंसे…
- 3.11अ. 3
Your duty nourishes the whole, and the whole nourishes you back.
प्रजापति ब्रह्माजीने सृष्टिके आदिकालमें कर्तव्यकर्मोंके विधानसहित प्रजामनुष्य आदि की रचना करके उनसे, प्रधानतया मनुष्योंस…
- 3.12अ. 3
What is received must be offered back, or it becomes theft.
यज्ञसे भावित पुष्ट हुए देवता भी तुमलोगोंको बिना माँगे ही कर्तव्यपालनकी आवश्यक सामग्री देते रहेंगे । इस प्रकार उन देवताओ…
- 3.13अ. 3
What is offered purifies; what is hoarded for the self corrupts.
यज्ञशेष योग का अनुभव करनेवाले श्रेष्ठ मनुष्य सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त हो जाते हैं । परन्तु जो केवल अपने लिये ही पकाते अर्…
- 3.14अ. 3
Action sustains the cycle that makes life possible.
सम्पूर्ण प्राणी अन्नसे उत्पन्न होते हैं । अन्न वर्षासे होती है । वर्षा यज्ञसे होती है । यज्ञ कर्मोंसे निष्पन्न होता ह…
- 3.15अ. 3
Right action is not random; it rests in a deeper, sustaining order.
सम्पूर्ण प्राणी अन्नसे उत्पन्न होते हैं । अन्न वर्षासे होती है । वर्षा यज्ञसे होती है । यज्ञ कर्मोंसे निष्पन्न होता ह…
- 3.16अ. 3
A life detached from duty empties itself from within.
हे पार्थ जो मनुष्य इस लोकमें इस प्रकार परम्परासे प्रचलित सृष्टिचक्रके अनुसार नहीं चलता, वह इन्द्रियोंके द्वारा भोगोंमें …
- 3.17अ. 3
Fulfillment in the true self ends the need for striving.
जो मनुष्य अपनेआपमें ही रमण करनेवाला और अपनेआपमें ही तृप्त तथा अपनेआपमें ही संतुष्ट है, उसके लिये कोई कर्तव्य नहीं है ॥
- 3.18अ. 3
Freedom ends the need to profit from action.
उस कर्मयोगसे सिद्ध हुए महापुरुषका इस संसारमें न तो कर्म करनेसे कोई प्रयोजन रहता है, और न कर्म न करनेसे ही कोई प्रयोजन रह…
- 3.19अ. 3
Freedom comes when action is done without grasping at its reward.
इसलिये तू निरन्तर आसक्तिरहित होकर कर्तव्यकर्मका भलीभाँति आचरण कर क्योंकि आसक्तिरहित होकर कर्म करता हुआ मनुष्य परमात्माको…
- 3.20अ. 3
Perfection comes through action that serves more than the self.
राजा जनकजैसे अनेक महापुरुष भी कर्मके द्वारा ही परमसिद्धिको प्राप्त हुए हैं । इसलिये लोकसंग्रहको देखते हुए भी तू निष्काम…
- 3.21अ. 3
The highest standard is not spoken; it is copied.
श्रेष्ठ मनुष्य जोजो आचरण करता है, दूसरे मनुष्य वैसावैसा ही आचरण करते हैं । वह जो कुछ प्रमाण देता है, दूसरे मनुष्य उसीके…
- 3.22अ. 3
Even the fulfilled keep working, because action need not come from lack.
हे पार्थ मुझे तीनों लोकोंमें न तो कुछ कर्तव्य है और न कोई प्राप्त करनेयोग्य वस्तु अप्राप्त है, फिर भी मैं कर्तव्यकर्ममें…
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- 3.23अ. 3
Careless withdrawal by the highest would unravel everyone below.
हे पार्थ अगर मैं किसी समय सावधान होकर कर्तव्यकर्म न करूँ तो बड़ी हानि हो जाय क्योंकि मनुष्य सब प्रकारसे मेरे ही मार्गका …
- 3.24अ. 3
Even the highest must act to prevent disorder.
हे पार्थ अगर मैं किसी समय सावधान होकर कर्तव्यकर्म न करूँ तो बड़ी हानि हो जाय क्योंकि मनुष्य सब प्रकारसे मेरे ही मार्गका…
- 3.25अ. 3
Wisdom keeps acting, but never for personal gain.
हे भरतवंशोद्भव अर्जुन कर्ममें आसक्त हुए अज्ञानीजन जिस प्रकार कर्म करते हैं, आसक्तिरहित विद्वान भी लोकसंग्रह करना चाहता ह…
- 3.26अ. 3
Wisdom should steady people, not shake their footing.
हे भरतवंशोद्भव अर्जुन कर्ममें आसक्त हुए अज्ञानीजन जिस प्रकार कर्म करते हैं आसक्तिरहित विद्वान भी लोकसंग्रह करना चाहता हु…
- 3.27अ. 3
The doer is imagined; action belongs to nature's forces.
सम्पूर्ण कर्म सब प्रकारसे प्रकृतिके गुणोंद्वारा किये जाते हैं परन्तु अहंकारसे मोहित अन्तःकरणवाला अज्ञानी मनुष्य मैं कर्त…
- 3.28अ. 3
Seeing action as nature's movement ends attachment.
हे महाबाहो गुणविभाग और कर्मविभागको तत्त्वसे जाननेवाला महापुरुष सम्पूर्ण गुण ही गुणोंमें बरत रहे हैं ऐसा मानकर उनमें आसक…
- 3.29अ. 3
Clarity should guide confusion, not crush it.
प्रकृतिजन्य गुणोंसे अत्यन्त मोहित हुए अज्ञानी मनुष्य गुणों और कर्मोंमें आसक्त रहते हैं । उन पूर्णतया न समझनेवाले मन्दबु…
- 3.30अ. 3
Action becomes free when you stop claiming its results.
तू विवेकवती बुद्धिके द्वारा सम्पूर्ण कर्तव्यकर्मोंको मेरे अर्पण करके कामना, ममता और संतापरहित होकर युद्धरूप कर्तव्यकर्मक…
- 3.31अ. 3
Trusting the teaching frees action from its binding force.
जो मनुष्य दोषदृष्टिसे रहित होकर श्रद्धापूर्वक मेरे इस पूर्वश्लोकमें वर्णित मतका सदा अनुसरण करते हैं, वे भी कर्मोंके बन्ध…
- 3.32अ. 3
Rejecting clear guidance leaves the mind stranded.
परन्तु जो मनुष्य मेरे इस मतमें दोषदृष्टि करते हुए इसका अनुष्ठान नहीं करते, उन सम्पूर्ण ज्ञानोंमें मोहित और अविवेकी मनुष्…
- 3.33अ. 3
Nature drives behavior; force alone cannot overrule it.
सम्पूर्ण प्राणी प्रकृतिको प्राप्त होते हैं । ज्ञानी महापुरुष भी अपनी प्रकृतिके अनुसार चेष्टा करता है । फिर इसमें किसीक…
- 3.34अ. 3
Freedom begins when attraction and aversion stop steering action.
इन्द्रियइन्द्रियके अर्थमें प्रत्येक इन्द्रियके प्रत्येक विषयमें मनुष्यके राग और द्वेष व्यवस्थासे अनुकूलता और प्रतिकूलताक…
- 3.35अ. 3
Imperfect right action is safer than perfect imitation.
अच्छी तरह आचरणमें लाये हुए दूसरेके धर्मसे गुणोंकी कमीवाला अपना धर्म श्रेष्ठ है । अपने धर्ममें तो मरना भी कल्याणकारक है …
- 3.36अ. 3
Compulsion has a cause, and Arjuna wants to name it.
अर्जुन बोले हे वार्ष्णेय फिर यह मनुष्य न चाहता हुआ भी जबर्दस्ती लगाये हुएकी तरह किससे प्रेरित होकर पापका आचरण करता है …
- 3.37अ. 3
Desire is not harmless; it mutates into the force that ruins judgment.
श्रीभगवान् बोले रजोगुणसे उत्पन्न हुआ यह काम ही क्रोध है । यह बहुत खानेवाला और महापापी है । इस विषयमें तू इसको ही वैरी…
- 3.38अ. 3
Clear seeing is not destroyed; it is simply covered.
जैसे धुएँसे अग्नि और मैलसे दर्पण ढक जाता है तथा जैसे जेरसे गर्भ ढका रहता है, ऐसे ही उस कामके द्वारा यह ज्ञान विवेक ढका …
- 3.39अ. 3
Desire does not just tempt; it hides wisdom itself.
और हे कुन्तीनन्दन इस अग्निके समान कभी तृप्त न होनेवाले और विवेकियोंके नित्य वैरी इस कामके द्वारा मनुष्यका विवेक ढका हुआ…
- 3.40अ. 3
Desire conquers by hijacking the mind's own instruments.
इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि इस कामके वासस्थान कहे गये हैं । यह काम इन इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि के द्वारा ज्ञानको ढककर देहा…
- 3.41अ. 3
Sense-control comes before clear action.
इसलिये हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन तू सबसे पहले इन्द्रियोंको वशमें करके इस ज्ञान और विज्ञानका नाश करनेवाले महान् पा…
- 3.42अ. 3
Desire sits above reason, so mastery must begin earlier.
इन्द्रियोंको स्थूलशरीरसे पर श्रेष्ठ, सबल, प्रकाशक, व्यापक तथा सूक्ष्म कहते हैं । इन्द्रियोंसे पर मन है, मनसे भी पर बुद्…
- 3.43अ. 3
Desire loses power when the higher mind takes command.
इन्द्रियोंको स्थूलशरीरसे पर श्रेष्ठ, सबल, प्रकाशक, व्यापक तथा सूक्ष्म कहते हैं । इन्द्रियोंसे पर मन है, मनसे भी पर बुद्…