कर्म योग · श्लोक 2

भगवद् गीता 3.2

Confusion ends when the mind asks for one clear direction.

व्यामिश्रेणेव वाक्येन बुद्धिं मोहयसीव मे । तदेकं वद निश्िचत्य येन श्रेयोऽहमाप्नुयाम् ॥
हिन्दी अनुवाद
अर्जुन बोले हे जनार्दन अगर आप कर्मसे बुद्धि ज्ञान को श्रेष्ठ मानते हैं, तो फिर हे केशव मुझे घोर कर्ममें क्यों लगाते हैं आप अपने मिले हुएसे वचनोंसे मेरी बुद्धिको मोहितसी कर रहे हैं । अतः आप निश्चय करके एक बात को कहिये, जिससे मैं कल्याणको प्राप्त हो जाऊँ ॥
English
Arjuna said: Your words seem mixed and confusing to me. Tell me one thing clearly, so I may find the highest good.
विषय:arjuna-doubtmixed-teachingclear-guidance
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