अध्याय 4 · ज्ञान और कर्म-संन्यास का योग

ज्ञान कर्म संन्यास योग

ज्ञान यज्ञ। कर्म समर्पण। कृष्ण अपने अवतारों और योग की परंपरा का स्मरण कराते हैं।

सभी 42 श्लोक नीचे।

Wisdom translation, edited by Ankur Shukla. Commentary AI-drafted, human-reviewed. Reviewed June 2026. Methodology →

Krishna on the lineage of yoga and the wisdom of action
प्रथम श्लोक · 4.1
श्री भगवानुवाचइमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम् । विवस्वान् मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत् ॥
श्रीभगवान् बोले मैंने इस अविनाशी योगको सूर्यसे कहा था । फिर सूर्यने अपने पुत्र वैवस्वत मनुसे कहा और मनुने अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकुसे कहा ॥
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