अध्याय 5 · संन्यास का योग

कर्म संन्यास योग

कर्म और संन्यास दो मार्ग नहीं, एक हैं। योगी संसार में कर्म करता है, अडिग रहकर।

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Wisdom translation, edited by Ankur Shukla. Commentary AI-drafted, human-reviewed. Reviewed June 2026. Methodology →

Krishna on action and renunciation as one path
प्रथम श्लोक · 5.1
अर्जुन उवाचसंन्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि । यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्िचतम् ॥
अर्जुन बोले हे कृष्ण आप कर्मोंका स्वरूपसे त्याग करनेकी और फिर कर्मयोगकी प्रशंसा करते हैं । अतः इन दोनों साधनोंमें जो एक निश्चितरूपसे कल्याणकारक हो, उसको मेरे लिये कहिये ॥
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