विषय · 95 श्लोक

भगवद् गीता में Kurukshetra

कर्तव्य का क्षेत्र। वह भूमि जहाँ गीता कही गई। ये वे श्लोक हैं जो पूरे संवाद को उसके स्थान में बाँधते हैं।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 1.1Speaker: Dhritarashtra
धृतराष्ट्र उवाचधर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय
अर्थ · हिन्दी
धृतराष्ट्र बोले हे संजय धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से इकट्ठे हुए मेरेे और पाण्डु के पुत्रों ने भी क्या किया ॥
सार
Dhritarashtra asks Sanjaya what happened when both sides gathered on the battlefield, ready to fight.
The war begins in a question, not a sword strike.
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भगवद् गीता 1.2Speaker: Sanjaya
सञ्जय उवाचदृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा
आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत्
अर्थ · हिन्दी
संजय बोले उस समय वज्रव्यूहसे खड़ी हुई पाण्डवसेना को देखकर राजा दुर्योधन द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन बोला ॥
सार
Duryodhana sees the Pandava army in battle formation and goes to Drona to speak.
War becomes real the moment the enemy is seen clearly.
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भगवद् गीता 1.3Speaker: Duryodhana
पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता
अर्थ · हिन्दी
हे आचार्य आपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न के द्वारा व्यूहरचना से खड़ी की हुई पाण्डवों की इस बड़ी भारी सेना को देखिये ॥
सार
Duryodhana points out the Pandava army to Drona and reminds him that the commander is Drona's own clever student.
A battlefield can be won first by how it is described.
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