विषय · 18 श्लोक

भगवद् गीता में Tamas

भगवद् गीता के 18 श्लोक जो tamas पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 8.9Speaker: Krishna
कविं पुराणमनुशासितारमणोरणीयांसमनुस्मरेद्यः
सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूपमादित्यवर्णं तमसः परस्तात्
अर्थ · हिन्दी
जो सर्वज्ञ, पुराण, शासन करनेवाला, सूक्ष्मसेसूक्ष्म, सबका धारणपोषण करनेवाला, अज्ञानसे अत्यन्त परे, सूर्यकी तरह प्रकाशस्वरूप ऐसे अचिन्त्य स्वरूपका चिन्तन करता है ॥
सार
Remember the supreme reality as wise, ancient, subtle, sustaining everything, beyond thought, radiant, and beyond darkness.
Hold the ungraspable source in mind, not the passing form.
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भगवद् गीता 13.18Speaker: Krishna
ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमसः परमुच्यते
ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम्
अर्थ · हिन्दी
वह परमात्मा सम्पूर्ण ज्योतियोंका भी ज्योति और अज्ञानसे अत्यन्त परे कहा गया है । वह ज्ञानस्वरूप, जाननेयोग्य, ज्ञानसाधनसमुदाय से प्राप्त करनेयोग्य और सबके हृदयमें विराजमान है ॥
सार
The supreme reality is brighter than all light, beyond ignorance, and present in every heart. It is both what is known and the means of knowing it.
What illumines everything is already nearest to you.
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भगवद् गीता 14.8Speaker: Krishna
तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम्
प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति भारत
अर्थ · हिन्दी
हे भरतवंशी अर्जुन सम्पूर्ण देहधारियोंको मोहित करनेवाले तमोगुणको तुम अज्ञानसे उत्पन्न होनेवाला समझो । वह प्रमाद, आलस्य और निद्राके द्वारा देहधारियोंको बाँधता है ॥
सार
Tamas is the force of confusion and inertia. It clouds judgment and traps people through carelessness, laziness, and sleepiness.
Confusion binds most through laziness, not force.
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