भगवद् गीता में Sanjaya
संजय साक्षी हैं। उन्हीं के माध्यम से अंधे राजा धृतराष्ट्र वह संवाद सुनते हैं जो वे देख नहीं सके।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ॥
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः ॥
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ॥
- 1.17अ. 1
Names and conches turn hesitation into commitment.
हे राजन् श्रेष्ठ धनुषवाले काशिराज और महारथी शिखण्डी तथा धृष्टद्युम्न एवं राजा विराट और अजेय सात्यकि, राजा द्रुपद और द्रौ
- 1.24अ. 1
The chariot is placed where choice becomes unavoidable.
संजय बोले हे भरतवंशी राजन् निद्राविजयी अर्जुन के द्वारा इस तरह कहने पर अन्तर्यामी भगवान् श्रीकृष्ण ने दोनों सेनाओं के म
- 1.47अ. 1
Grief can make even a warrior lay down his weapons.
संजय बोले ऐसा कहकर शोकाकुल मनवाले अर्जुन बाणसहित धनुष का त्याग करके युद्धभूमि में रथके मध्यभाग में बैठ गये ॥
- 2.1अ. 2
Grief opens the door for instruction.
संजय बोले वैसी कायरता से आविष्ट उन अर्जुन के प्रति, जो कि विषाद कर रहे हैं और आँसुओं के कारण जिनके नेत्रों की देखने की
- 2.9अ. 2
Refusal has stopped the war inside him.
संजय बोले हे शत्रुतापन धृतराष्ट्र ऐसा कहकर निद्राको जीतनेवाले अर्जुन अन्तर्यामी भगवान् गोविन्दसे मैं युद्ध नहीं करूँगा
- 11.10अ. 11
The divine form cannot be held inside one human image.
जिसके अनेक मुख और नेत्र हैं, अनेक तहरके अद्भुत दर्शन हैं, अनेक दिव्य आभूषण हैं, हाथोंमें उठाये हुए अनेक दिव्य आयुध हैं त
- 11.35अ. 11
Awe can break speech before it becomes prayer.
सञ्जय बोले भगवान् केशवका यह वचन सुनकर भयसे कम्पित हुए किरीटी अर्जुन हाथ जोड़कर नमस्कार करके और अत्यन्त भयभीत होकर फिर प
- 11.50अ. 11
A vision can shake you; compassion brings you back.
सञ्जय बोले वासुदेवभगवान् ने अर्जुनसे ऐसा कहकर फिर उसी प्रकारसे अपना रूप देवरूप दिखाया और महात्मा श्रीकृष्णने पुनः सौम्य
- 18.74अ. 18
A true dialogue can leave the listener shaken and changed.
सञ्जय बोले इस प्रकार मैंने भगवान् वासुदेव और महात्मा पृथानन्दन अर्जुनका यह रोमाञ्चित करनेवाला अद्भुत संवाद सुना ॥
- 18.75अ. 18
The deepest teaching is received, not invented.
व्यासजीकी कृपासे मैंने स्वयं इस परम गोपनीय योग गीताग्रन्थ को कहते हुए साक्षात् योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्णसे सुना है ॥
- 18.76अ. 18
A sacred conversation keeps giving joy each time it is remembered.
हे राजन् भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुनके इस पवित्र और अद्भुत संवादको याद करकरके मैं बारबार हर्षित हो रहा हूँ ॥
- 18.77अ. 18
Remembering Krishna's vast form still overwhelms the mind with wonder.
हे राजन् भगवान् श्रीकृष्णके उस अत्यन्त अद्भुत विराट्रूपको याद करकरके मेरेको बड़ा भारी आश्चर्य हो रहा है और मैं बारबार ह
- 18.78अ. 18
Right action carries its own victory.
जहाँ योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण हैं और जहाँ गाण्डीवधनुषधारी अर्जुन हैं, वहाँ ही श्री, विजय, विभूति और अचल नीति है ऐसा मे