न वेदयज्ञाध्ययनैर्न दानैर्न च क्रियाभिर्न तपोभिरुग्रैः । एवंरूपः शक्य अहं नृलोकेद्रष्टुं त्वदन्येन कुरुप्रवीर ॥
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हे कुरुप्रवीर मनुष्यलोकमें इस प्रकारके विश्वरूपवाला मैं न वेदोंके पढ़नेसे, न यज्ञोंके अनुष्ठानसे, न दानसे, न उग्र तपोंसे और न मात्र क्रियाओंसे तेरे कृपापात्रके सिवाय और किसीके द्वारा देखा जाना शक्य हूँ ॥
English
I cannot be seen in this form in the human world by study of the Vedas, sacrifice, charity, severe austerity, or ritual acts—except by you, Arjuna.