क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति । कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्तः प्रणश्यति ॥
हिन्दी अनुवाद
वह तत्काल उसी क्षण धर्मात्मा हो जाता है और निरन्तर रहनेवाली शान्तिको प्राप्त हो जाता है । हे कुन्तीनन्दन तुम प्रतिज्ञा करो कि मेरे भक्तका विनाश पतन नहीं होता ॥
English
One who is devoted to Me quickly becomes righteous and attains lasting peace. O son of Kunti, declare it boldly: My devotee never perishes.