विषय · 14 श्लोक

भगवद् गीता में Dharma

धर्म वह है जो संसार को धारण करता है — आपकी भूमिका, आपका कर्तव्य, आपका मार्ग। गीता अर्जुन को धर्म थमाती नहीं — उसे पहचानने में मदद करती है।