एतान्यपि तु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा फलानि च । कर्तव्यानीति मे पार्थ निश्िचतं मतमुत्तमम् ॥
हिन्दी अनुवाद
हे पार्थ पूर्वोक्त यज्ञ, दान और तप इन कर्मोंको तथा दूसरे भी कर्मोंको आसक्ति और फलोंका त्याग करके करना चाहिये यह मेरा निश्चित किया हुआ उत्तम मत है ॥
English
Even these actions, and all other actions, should be done without attachment and without wanting their results. This is my settled and best teaching, O Arjuna.