विषय · 14 श्लोक

भगवद् गीता में Nishkama

फल की कामना के बिना कर्म। निष्काम कर्म गीता की सबसे कठिन और सबसे मुक्त शिक्षा है।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 2.47Speaker: Krishna
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि
अर्थ · हिन्दी
कर्तव्यकर्म करनेमें ही तेरा अधिकार है, फलोंमें कभी नहीं । अतः तू कर्मफलका हेतु भी मत बन और तेरी अकर्मण्यतामें भी आसक्ति न हो ॥
सार
You control your action, not what it produces. Do your duty without chasing the reward or getting attached to doing nothing.
Action belongs to you; the result does not.
पूरा श्लोक + ऑडियो पढ़ें →
भगवद् गीता 2.71Speaker: Krishna
विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः
निर्ममो निरहंकारः शांतिमधिगच्छति
अर्थ · हिन्दी
जो मनुष्य सम्पूर्ण कामनाओंका त्याग करके स्पृहारहित, ममतारहित और अहंकाररहित होकर आचरण करता है, वह शान्तिको प्राप्त होता है ॥
सार
A person who acts after releasing desire, possessiveness, and ego finds peace.
Peace begins when wanting, owning, and self-importance fall away.
पूरा श्लोक + ऑडियो पढ़ें →
भगवद् गीता 3.4Speaker: Krishna
कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते
संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति
अर्थ · हिन्दी
मनुष्य न तो कर्मोंका आरम्भ किये बिना निष्कर्मताको प्राप्त होता है और न कर्मोंके त्यागमात्रसे सिद्धिको ही प्राप्त होता है ॥
सार
Freedom does not come from simply stopping action, and perfection does not come from merely giving things up. Real growth requires a deeper way of acting.
Freedom is not found by escaping action, but by changing your relation to it.
पूरा श्लोक + ऑडियो पढ़ें →
सभी 14 श्लोक