विषय · 12 श्लोक

भगवद् गीता में Nishkama Karma

भगवद् गीता के 12 श्लोक जो nishkama karma पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 2.51Speaker: Krishna
कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः
जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम्
अर्थ · हिन्दी
समतायुक्त मनीषी साधक कर्मजन्य फलका त्याग करके जन्मरूप बन्धनसे मुक्त होकर निर्विकार पदको प्राप्त हो जाते हैं ॥
सार
Wise people let go of the results of their actions. That freedom breaks the chain that keeps them bound to repeated birth and suffering.
Freedom comes when action is done without clutching its reward.
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भगवद् गीता 3.18Speaker: Krishna
नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन
चास्य सर्वभूतेषु कश्िचदर्थव्यपाश्रयः
अर्थ · हिन्दी
उस कर्मयोगसे सिद्ध हुए महापुरुषका इस संसारमें न तो कर्म करनेसे कोई प्रयोजन रहता है, और न कर्म न करनेसे ही कोई प्रयोजन रहता है, तथा सम्पूर्ण प्राणियोंमें किसी भी प्राणीके साथ इसका किञ्चिन्मात्र भी स्वार्थका सम्बन्ध नहीं रहता ॥
सार
A person who has reached inner completeness no longer acts for personal gain. Neither action nor inaction adds anything to that person.
Freedom ends the need to profit from action.
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भगवद् गीता 3.19Speaker: Krishna
तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर
असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः
अर्थ · हिन्दी
इसलिये तू निरन्तर आसक्तिरहित होकर कर्तव्यकर्मका भलीभाँति आचरण कर क्योंकि आसक्तिरहित होकर कर्म करता हुआ मनुष्य परमात्माको प्राप्त हो जाता है ॥
सार
Keep doing what must be done, but do it without clinging to results. That kind of action leads you to the highest good.
Freedom comes when action is done without grasping at its reward.
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