भगवद् गीता में Tapas
तपस् साधना है — दंड नहीं, बल्कि वह स्वैच्छिक अनुशासन जो परिष्कृत करता है। गीता तीन प्रकार बताती है: शरीर का, वाणी का, मन का। और वह तपस् भी जो साधक को परिष्कृत नहीं — नष्ट करता है।
स्वाध्यायज्ञानयज्ञाश्च यतयः संशितव्रताः ॥
प्राणापानगती रुद्ध्वा प्राणायामपरायणाः ॥
सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥
- 6.46अ. 6
Inner mastery outranks every outer path.
सकामभाववाले तपस्वियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है, ज्ञानियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है और कर्मियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है ऐसा मेरा मत
- 7.9अ. 7
The sacred is already inside nature, vitality, and discipline.
पृथ्वीमें पवित्र गन्ध मैं हूँ, और अग्निमें तेज मैं हूँ, तथा सम्पूर्ण प्राणियोंमें जीवनीशक्ति मैं हूँ और तपस्वियोंमें तपस
- 8.28अ. 8
Knowing the way beyond rewards leads to the highest home.
योगी इसको शुक्ल और कृष्णमार्गके रहस्यको जानकर वेदोंमें, यज्ञोंमें, तपोंमें तथा दानमें जोजो पुण्यफल कहे गये हैं, उन सभी प
- 10.5अ. 10
All qualities are expressions of the same divine source.
बुद्धि, ज्ञान, असम्मोह, क्षमा, सत्य, दम, शम, सुख, दुःख, भव, अभाव, भय, अभय, अहिंसा, समता, तुष्टि, तप, दान, यश और अपयश प्
- 11.53अ. 11
The deepest vision comes through devotion, not mere accomplishment.
जिस प्रकार तुमने मुझे देखा है, इस प्रकारका चतुर्भुजरूपवाला मैं न तो वेदोंसे, न तपसे, न दानसे और न यज्ञसे ही देखा जा सकता
- 16.1अ. 16
Right action starts with disciplined character.
श्रीभगवान् बोले भयका सर्वथा अभाव अन्तःकरणकी शुद्धि ज्ञानके लिये योगमें दृढ़ स्थिति सात्त्विक दान इन्द्रियोंका दमन यज्ञ
- 17.5अ. 17
Harsh effort without right guidance can deepen ego instead of cleansing it.
जो मनुष्य शास्त्रविधिसे रहित घोर तप करते हैं जो दम्भ और अहङ्कारसे अच्छी तरह युक्त हैं जो भोगपदार्थ, आसक्ति और हठसे युक्त
- 17.6अ. 17
Harshness is not holiness when it destroys the body and ignores what lives within.
जो मनुष्य शास्त्रविधिसे रहित घोर तप करते हैं जो दम्भ और अहङ्कारसे अच्छी तरह युक्त हैं जो भोगपदार्थ, आसक्ति और हठसे युक्त
- 17.14अ. 17
The body itself can become a disciplined offering.
देवता, ब्राह्मण, गुरुजन और जीवन्मुक्त महापुरुषका पूजन करना, शुद्धि रखना, सरलता, ब्रह्मचर्यका पालन करना और हिंसा न करना
- 17.16अ. 17
A trained mind is its own austerity.
मनकी प्रसन्नता, सौम्य भाव, मननशीलता, मनका निग्रह और भावोंकी शुद्धि इस तरह यह मनसम्बन्धी तप कहा जाता है ॥
- 17.17अ. 17
True discipline is clean only when reward is no longer the motive.
परम श्रद्धासे युक्त फलेच्छारहित मनुष्योंके द्वारा तीन प्रकारशरीर, वाणी और मन का तप किया जाता है, उसको सात्त्विक कहते हैं
- 17.19अ. 17
Pain imposed in ignorance only deepens confusion.
जो तप मूढ़तापूर्वक हठसे अपनेको पीड़ा देकर अथवा दूसरोंको कष्ट देनेके लिये किया जाता है, वह तप तामस कहा गया है ॥
- 17.24अ. 17
Sacred action begins by naming the supreme reality first.
इसलिये वैदिक सिद्धान्तोंको माननेवाले पुरुषोंकी शास्त्रविधिसे नियत यज्ञ, दान और तपरूप क्रियाएँ सदा ऊँ इस परमात्माके नामका
- 17.25अ. 17
Freedom deepens when action stops demanding a private return.
तत् नामसे कहे जानेवाले परमात्माके लिये ही सब कुछ है ऐसा मानकर मुक्ति चाहनेवाले मनुष्योंद्वारा फलकी इच्छासे रहित होकर अन
- 17.27अ. 17
Steady offering makes ordinary action sacred.
यज्ञ, तप और दानरूप क्रियामें जो स्थिति निष्ठा है, वह भी सत् ऐसे कही जाती है और उस परमात्माके निमित्त किया जानेवाला कर्म
- 17.28अ. 17
Trust is what makes action real; without it, effort becomes empty.
हे पार्थ अश्रद्धासे किया हुआ हवन, दिया हुआ दान और तपा हुआ तप तथा और भी जो,कुछ किया जाय, वह सब असत् ऐसा कहा जाता है ।
- 18.3अ. 18
Renunciation is not simple refusal; some actions must remain.
श्रीभगवान् बोले कई विद्वान् काम्यकर्मोंके त्यागको संन्यास कहते हैं और कई विद्वान् सम्पूर्ण कर्मोंके फलके त्यागको त्याग
- 18.5अ. 18
What purifies you should be done, not dropped.
यज्ञ, दान और तपरूप कर्मोंका त्याग नहीं करना चाहिये, प्रत्युत उनको तो करना ही चाहिये क्योंकि यज्ञ, दान और तप ये तीनों ही
- 18.42अ. 18
True duty begins as disciplined character, not public role.
मनका निग्रह करना इन्द्रियोंको वशमें करना धर्मपालनके लिये कष्ट सहना बाहरभीतरसे शुद्ध रहना दूसरोंके अपराधको क्षमा करना शरी