भगवद् गीता में Samatva
समत्व वह समभाव है — उदासीनता नहीं, बल्कि सुख और दुःख, लाभ और हानि, प्रशंसा और निंदा के प्रति एक-सी स्थिरता। गीता इसे योग कहती है। यही स्थिरता साधना का असली गंतव्य है।
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ॥
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ॥
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम् ॥
- 4.22अ. 4
Equal-minded action leaves no hook for bondage.
जो कर्मयोगी फल की इच्छा के बिना, अपनेआप जो कुछ मिल जाय, उसमें सन्तुष्ट रहता है और जो ईर्ष्यासे रहित, द्वन्द्वोंसे अतीत त
- 5.19अ. 5
Sameness of mind is the real conquest; everything else is aftermath.
जिनका अन्तःकरण समतामें स्थित है, उन्होंने इस जीवितअवस्थामें ही सम्पूर्ण संसारको जीत लिया है ब्रह्म निर्दोष और सम है, इसल
- 5.20अ. 5
Steadiness begins when pleasure and pain lose their power over you.
जो प्रियको प्राप्त होकर हर्षित न हो और अप्रियको प्राप्त होकर उद्विग्न न हो, वह स्थिर बुद्धिवाला, मूढ़तारहित तथा ब्रह्मको
- 6.7अ. 6
Steadiness makes the highest reality feel near in every opposite.
जिसने अपनेआपपर अपनी विजय कर ली है, उस शीतउष्ण अनुकूलताप्रतिकूलता सुखदुःख तथा मानअपमानमें निर्विकार मनुष्यको परमात्मा नित
- 6.32अ. 6
Equal vision makes you unshaken by pleasure or pain.
हे अर्जुन जो ध्यानयुक्त ज्ञानी महापुरुष अपने शरीरकी उपमासे सब जगह अपनेको समान देखता है और सुख अथवा दुःखको भी समान देखता
- 9.29अ. 9
Equality is universal; intimacy is born through devotion.
मैं सम्पूर्ण प्राणियोंमें समान हूँ । उन प्राणियोंमें न तो कोई मेरा द्वेषी है और न कोई प्रिय है । परन्तु जो भक्तिपूर्वक
- 12.3अ. 12
The deepest devotion reaches what never changes.
जो अपनी इन्द्रियोंको वशमें करके अचिन्त्य, सब जगह परिपूर्ण, अनिर्देश्य, कूटस्थ, अचल, ध्रुव, अक्षर और अव्यक्तकी उपासना करत
- 12.4अ. 12
Reach the divine by mastering yourself and caring for everyone.
जो अपनी इन्द्रियोंको वशमें करके अचिन्त्य, सब जगह परिपूर्ण, अनिर्देश्य, कूटस्थ, अचल, ध्रुव, अक्षर और अव्यक्तकी उपासना करत
- 12.18अ. 12
Real devotion stays even when life feels hostile or kind.
जो शत्रु और मित्रमें तथा मानअपमानमें सम है और शीतउष्ण अनुकूलताप्रतिकूलता तथा सुखदुःखमें सम है एवं आसक्तिसे रहित है, और ज
- 14.24अ. 14
Steadiness means nothing external gets to decide your center.
जो धीर मनुष्य सुखदुःखमें सम तथा अपने स्वरूपमें स्थित रहता है जो मिट्टीके ढेले, पत्थर और सोनेमें सम रहता है जो प्रियअप्रि