विषय · 23 श्लोक

भगवद् गीता में Kama

काम केवल इच्छा नहीं — वह खिंचाव है जो इन्द्रियों को विषयों की ओर ले जाता है और उस पूरी शृंखला को शुरू करता है जिसके विरुद्ध गीता चेतावनी देती है। ये वे श्लोक हैं जहाँ कृष्ण दिखाते हैं कि काम एक जीवन के साथ क्या करता है।

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भगवद् गीता 2.42Speaker: Krishna
यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः
वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः
अर्थ · हिन्दी
हे पृथानन्दन जो कामनाओंमें तन्मय हो रहे हैं, स्वर्गको ही श्रेष्ठ माननेवाले हैं, वेदोंमें कहे हुए सकाम कर्मोंमें प्रीति रखनेवाले हैं, भोगोंके सिवाय और कुछ है ही नहीं ऐसा कहनेवाले हैं, वे अविवेकी मनुष्य इस प्रकारकी जिस पुष्पित दिखाऊ शोभायुक्त वाणीको कहा करते हैं, जो कि जन्मरूपी कर्मफलको देनेवाली है तथा भोग और ऐश्वर्यकी प्राप्तिके लिये बहुतसी क्रियाओंका वर्णन करनेवाली है ॥
सार
Ignorant people speak in attractive, polished language that promises pleasure and reward. They get stuck in ritual talk and claim there is nothing beyond it.
Beautiful words can hide a mind trapped by desire.
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भगवद् गीता 2.55Speaker: Krishna
श्री भगवानुवाचप्रजहाति यदा कामान् सर्वान् पार्थ मनोगतान्
आत्मन्येवात्मना तुष्टः स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते
अर्थ · हिन्दी
श्रीभगवान् बोले हे पृथानन्दन जिस कालमें साधक मनोगत सम्पूर्ण कामनाओंका अच्छी तरह त्याग कर देता है और अपनेआपसे अपनेआपमें ही सन्तुष्ट रहता है, उस कालमें वह स्थितप्रज्ञ कहा जाता है ॥
सार
A person becomes steady in wisdom when all mental desires are released and contentment comes from within, not from outside things.
Steadiness begins when desire no longer defines your sense of enough.
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भगवद् गीता 2.62Speaker: Krishna
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते
सङ्गात् संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते
अर्थ · हिन्दी
विषयोंका चिन्तन करनेवाले मनुष्यकी उन विषयोंमें आसक्ति पैदा हो जाती है । आसक्तिसे कामना पैदा होती है । कामनासे क्रोध पैदा होता है । क्रोध होनेपर सम्मोह मूढ़भाव हो जाता है । सम्मोहसे स्मृति भ्रष्ट हो जाती है । स्मृति भ्रष्ट होनेपर बुद्धिका नाश हो जाता है । बुद्धिका नाश होनेपर मनुष्यका पतन हो जाता है ॥
सार
Fixating on pleasures or objects creates attachment. Attachment turns into wanting, and wanting turns into anger when blocked.
What you dwell on becomes what you cling to, then what burns you.
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