भगवद् गीता में Equanimity
भगवद् गीता के 23 श्लोक जो equanimity पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत ॥
समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते ॥
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ॥
- 2.48अ. 2
Equanimity turns action into yoga.
हे धनञ्जय तू आसक्तिका त्याग करके सिद्धिअसिद्धिमें सम होकर योगमें स्थित हुआ कर्मोंको कर क्योंकि समत्व ही योग कहा जाता है
- 2.54अ. 2
Steady wisdom must be recognizable in ordinary movement.
अर्जुन बोले हे केशव परमात्मामें स्थित स्थिर बुद्धिवाले मनुष्यके क्या लक्षण होते हैं वह स्थिर बुद्धिवाला मनुष्य कैसे बो
- 2.56अ. 2
Steadiness remains when pleasure and pain lose their grip.
दुःखोंकी प्राप्ति होनेपर जिसके मनमें उद्वेग नहीं होता और सुखोंकी प्राप्ति होनेपर जिसके मनमें स्पृहा नहीं होती तथा जो राग
- 2.57अ. 2
Steady wisdom does not need life to feel favorable.
सब जगह आसक्तिरहित हुआ जो मनुष्य उसउस शुभअशुभको प्राप्त करके न तो अभिनन्दित होता है और न द्वेष करता है, उसकी बुद्धि प्रति
- 2.63अ. 2
Anger first distorts seeing, then destroys the mind that should guide action.
विषयोंका चिन्तन करनेवाले मनुष्यकी उन विषयोंमें आसक्ति पैदा हो जाती है । आसक्तिसे कामना पैदा होती है । कामनासे क्रोध पै
- 2.65अ. 2
Clear seeing ends suffering and lets understanding settle at once.
वशीभूत अन्तःकरणवाला कर्मयोगी साधक रागद्वेषसे रहित अपने वशमें की हुई इन्द्रियोंके द्वारा विषयोंका सेवन करता हुआ अन्तःकरणक
- 2.70अ. 2
Peace belongs to the one who stays steady while desire moves.
जैसे सम्पूर्ण नदियोंका जल चारों ओरसे जलद्वारा परिपूर्ण समुद्रमें आकर मिलता है, पर समुद्र अपनी मर्यादामें अचल प्रतिष्ठित
- 2.72अ. 2
Steadiness in the supreme reality ends confusion, even at life’s edge.
हे पृथानन्दन यह ब्राह्मी स्थिति है । इसको प्राप्त होकर कभी कोई मोहित नहीं होता । इस स्थितिमें यदि अन्तकालमें भी स्थित
- 5.19अ. 5
Sameness of mind is the real conquest; everything else is aftermath.
जिनका अन्तःकरण समतामें स्थित है, उन्होंने इस जीवितअवस्थामें ही सम्पूर्ण संसारको जीत लिया है ब्रह्म निर्दोष और सम है, इसल
- 5.20अ. 5
Steadiness begins when pleasure and pain lose their power over you.
जो प्रियको प्राप्त होकर हर्षित न हो और अप्रियको प्राप्त होकर उद्विग्न न हो, वह स्थिर बुद्धिवाला, मूढ़तारहित तथा ब्रह्मको
- 6.8अ. 6
True mastery makes gold and dust feel identical.
जिसका अन्तःकरण ज्ञानविज्ञानसे तृप्त है, जो कूटकी तरह निर्विकार है, जितेन्द्रिय है और मिट्टीके ढेले, पत्थर तथा स्वर्णमें
- 6.9अ. 6
Equal vision toward all people marks the highest steadiness.
सुहृद्, मित्र, वैरी, उदासीन, मध्यस्थ, द्वेष्य और सम्बन्धियोंमें तथा साधुआचरण करनेवालोंमें और पापआचरण करनेवालोंमें भी समब
- 6.32अ. 6
Equal vision makes you unshaken by pleasure or pain.
हे अर्जुन जो ध्यानयुक्त ज्ञानी महापुरुष अपने शरीरकी उपमासे सब जगह अपनेको समान देखता है और सुख अथवा दुःखको भी समान देखता
- 12.15अ. 12
True devotion leaves no wake of disturbance.
जिससे किसी प्राणीको उद्वेग नहीं होता और जिसको खुद भी किसी प्राणीसे उद्वेग नहीं होता तथा जो हर्ष, अमर्ष ईर्ष्या, भय और उद
- 12.17अ. 12
Devotion becomes steady when liking and disliking no longer rule the heart.
जो न कभी हर्षित होता है, न द्वेष करता है, न शोक करता है, न कामना करता है और जो शुभअशुभ कर्मोंमें रागद्वेषका त्यागी है, व
- 12.18अ. 12
Real devotion stays even when life feels hostile or kind.
जो शत्रु और मित्रमें तथा मानअपमानमें सम है और शीतउष्ण अनुकूलताप्रतिकूलता तथा सुखदुःखमें सम है एवं आसक्तिसे रहित है, और ज
- 14.22अ. 14
Freedom begins when changing states stop controlling your response.
श्रीभगवान् बोले हे पाण्डव प्रकाश, प्रवृत्ति तथा मोह ये सभी अच्छी तरहसे प्रवृत्त हो जायँ तो भी गुणातीत मनुष्य इनसे द्व
- 14.23अ. 14
Freedom begins when movement happens, but identity does not.
जो उदासीनकी तरह स्थित है और जो गुणोंके द्वारा विचलित नहीं किया जा सकता तथा गुण ही गुणोंमें बरत रहे हैं इस भावसे जो अपने
- 14.24अ. 14
Steadiness means nothing external gets to decide your center.
जो धीर मनुष्य सुखदुःखमें सम तथा अपने स्वरूपमें स्थित रहता है जो मिट्टीके ढेले, पत्थर और सोनेमें सम रहता है जो प्रियअप्रि
- 14.25अ. 14
Freedom begins when praise, blame, and personal impulse lose their power over you.
जो धीर मनुष्य सुखदुःखमें सम तथा अपने स्वरूपमें स्थित रहता है जो मिट्टीके ढेले, पत्थर और सोनेमें सम रहता है जो प्रियअप्रि