विषय · 12 श्लोक
भगवद् गीता में Duryodhana
भगवद् गीता के 12 श्लोक जो duryodhana पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।
- 1.2संजय बोले उस समय वज्रव्यूहसे खड़ी हुई पाण्डवसेना को देखकर राजा दुर्योधन द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन बोला ॥
- 1.3हे आचार्य आपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न के द्वारा व्यूहरचना से खड़ी की हुई पाण्डवों की इस बड़ी भारी सेना को देखिये ॥
- 1.4यहाँ पाण्डवों की सेना में बड़ेबड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़ेबड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं । उनमें युयुधान सात्य
- 1.6यहाँ पाण्डवों की सेना में बड़ेबड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़ेबड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं । उनमें युयुधान सात्य
- 1.7हे द्विजोत्तम हमारे पक्ष में भी जो मुख्य हैं, उनपर भी आप ध्यान दीजिये । आपको याद दिलाने के लिये मेरी सेना के जो नायक हैं, उनको मैं कहता हूँ
- 1.8आप द्रोणाचार्य और पितामह भीष्म तथा कर्ण और संग्रामविजयी कृपाचार्य तथा वैसे ही अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त का पुत्र भूरिश्रवा ॥
- 1.9इनके अतिरिक्त बहुतसे शूरवीर हैं, जिन्होंने मेरे लिये अपने जीने की इच्छा का भी त्याग कर दिया है और जो अनेक प्रकार के शस्त्रअस्त्रों को चलानेव
- 1.10वह हमारी सेना पाण्डवों पर विजय करने में अपर्याप्त है, असमर्थ है क्योंकि उसके संरक्षक उभयपक्षपाती भीष्म हैं । परन्तु इन पाण्डवों की सेना हमा
- 1.11आप सबकेसब लोग सभी मोर्चों पर अपनीअपनी जगह दृढ़ता से स्थित रहते हुए ही पितामह भीष्म की चारों ओर से रक्षा करें ॥
- 1.12दुर्योधन के हृदय में हर्ष उत्पन्न करते हुए कुरुवृद्ध प्रभावशाली पितामह भीष्म ने सिंह के समान गरज कर जोर से शंख बजाया ॥
- 1.19पाण्डवसेना के शंखों के उस भयंकर शब्द ने आकाश और पृथ्वी को भी गुँजाते हुए अन्यायपूर्वक राज्य हड़पनेवाले दुर्योधन आदि के हृदय विदीर्ण कर दिये
- 1.23दुष्टबुद्धि दुर्योधन का युद्ध में प्रिय करने की इच्छावाले जो ये राजालोग इस सेना में आये हुए हैं, युद्ध करने को उतावले हुए इन सबको मैं देख लू