विषय · 12 श्लोक

भगवद् गीता में Adharma

भगवद् गीता के 12 श्लोक जो adharma पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 1.39Speaker: Arjuna
कथं ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम्
कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन
अर्थ · हिन्दी
यद्यपि लोभ के कारण जिनका विवेकविचार लुप्त हो गया है, ऐसे ये दुर्योधन आदि कुल का नाश करने से होनेवाले दोष को और मित्रों के साथ द्वेष करने से होनेवाले पाप को नहीं देखते, तो भी हे जनार्दन कुल का नाश करने से होनेवाले दोष को ठीकठीक जाननेवाले हमलोग इस पाप से निवृत्त होनेका विचार क्यों न करें ॥
सार
Arjuna says that because he can see the harm caused by destroying the family, he and his side should turn away from this wrong action.
Clear sight makes withdrawal from harm the only sane choice.
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भगवद् गीता 1.40Speaker: Arjuna
कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत
अर्थ · हिन्दी
कुल का क्षय होने पर सदा से चलते आये कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं और धर्म का नाश होनेपर बचे हुए सम्पूर्ण कुल को अधर्म दबा लेता है ॥
सार
When a family is broken, its long-standing duties disappear. Once duty is gone, wrongdoing spreads through the whole family.
Destroy the family, and the moral order inside it collapses.
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भगवद् गीता 1.41Speaker: Arjuna
अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः
स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः
अर्थ · हिन्दी
हे कृष्ण अधर्म के अधिक बढ़ जाने से कुल की स्त्रियाँ दूषित हो जाती हैं और हे वार्ष्णेय स्त्रियों के दूषित होने पर वर्णसंकर पैदा हो जाते हैं ॥
सार
Arjuna fears that when lawlessness takes over a family, women are harmed and social order breaks down further.
When order breaks, the damage spreads into future generations.
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