नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन । न चास्य सर्वभूतेषु कश्िचदर्थव्यपाश्रयः ॥
Hindi · हिन्दी
उस कर्मयोगसे सिद्ध हुए महापुरुषका इस संसारमें न तो कर्म करनेसे कोई प्रयोजन रहता है, और न कर्म न करनेसे ही कोई प्रयोजन रहता है, तथा सम्पूर्ण प्राणियोंमें किसी भी प्राणीके साथ इसका किञ्चिन्मात्र भी स्वार्थका सम्बन्ध नहीं रहता ॥
English
For the perfected person, no purpose remains in doing, and no purpose remains in not doing. No being in the world is a source of personal gain.