विषय · 12 श्लोक

भगवद् गीता में Sannyasa

भगवद् गीता के 12 श्लोक जो sannyasa पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 3.4Speaker: Krishna
कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते
संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति
अर्थ · हिन्दी
मनुष्य न तो कर्मोंका आरम्भ किये बिना निष्कर्मताको प्राप्त होता है और न कर्मोंके त्यागमात्रसे सिद्धिको ही प्राप्त होता है ॥
सार
Freedom does not come from simply stopping action, and perfection does not come from merely giving things up. Real growth requires a deeper way of acting.
Freedom is not found by escaping action, but by changing your relation to it.
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भगवद् गीता 5.2Speaker: Krishna
श्री भगवानुवाचसंन्यासः कर्मयोगश्च निःश्रेयसकरावुभौ
तयोस्तु कर्मसंन्यासात्कर्मयोगो विशिष्यते
अर्थ · हिन्दी
श्रीभगवान् बोले संन्यास सांख्ययोग और कर्मयोग दोनों ही कल्याण करनेवाले हैं । परन्तु उन दोनोंमें भी कर्मसंन्यास सांख्ययोग से कर्मयोग श्रेष्ठ है ॥
सार
Both renunciation and karma yoga lead to the highest good, but Krishna says karma yoga is better than simply giving up action.
Renunciation matures when action continues without grasping.
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भगवद् गीता 5.24Speaker: Krishna
योऽन्तःसुखोऽन्तरारामस्तथान्तर्ज्योतिरेव यः
योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति
अर्थ · हिन्दी
जो मनुष्य केवल परमात्मामें सुखवाला है और केवल परमात्मामें रमण करनेवाला है तथा जो केवल परमात्मामें ज्ञानवाला है, वह ब्रह्ममें अपनी स्थितिका अनुभव करनेवाला सांख्ययोगी निर्वाण ब्रह्मको प्राप्त होता है ॥
सार
Real freedom comes to the person who finds joy, delight, and clear awareness within, rather than depending on outside things.
Inner fulfillment makes freedom possible right now.
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