आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेनमाश्चर्यवद्वदति तथैव चान्यः । आश्चर्यवच्चैनमन्यः श्रृणोतिश्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित् ॥
Hindi · हिन्दी
कोई इस शरीरीको आश्चर्यकी तरह देखता है और वैसे ही अन्य कोई इसका आश्चर्यकी तरह वर्णन करता है तथा अन्य कोई इसको आश्चर्यकी तरह सुनता है और इसको सुनकर भी कोई नहीं जानता । अर्थात यह शरीरी दुर्विज्ञेय है ॥
English
Some behold the inner being as wondrous; some speak of it as wondrous; some hear of it as wondrous; and even after hearing, no one truly knows it.