भगवद् गीता में Viveka
विवेक वह भेदबुद्धि है — सत्य को असत्य से, नित्य को अनित्य से, आत्मा को अनात्मा से पहचानने की क्षमता। इसके बिना सभी साधनाएँ अंधी हैं। ये वे श्लोक हैं जहाँ गीता इस क्षमता को प्रशिक्षित करती है।
गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः ॥
यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः ॥
यथोल्बेनावृतो गर्भस्तथा तेनेदमावृतम् ॥
- 4.40अ. 4
A divided mind loses both peace and direction.
विवेकहीन और श्रद्धारहित संशयात्मा मनुष्यका पतन हो जाता है । ऐसे संशयात्मा मनुष्यके लिये न यह लोक है न परलोक है और न सुख
- 13.1अ. 13
Real knowing starts by separating the seen from the seer.
श्रीभगवान् बोलेहे कुन्तीपुत्र अर्जुन यहरूपसे कहे जानेवाले शरीरको क्षेत्र कहते हैं और इस क्षेत्रको जो जानता है, उसको ज्ञ
- 13.4अ. 13
Clear seeing begins by separating the field from the one who knows it.
वह क्षेत्र जो है, जैसा है, जिन विकारोंवाला है और जिससे जो पैदा हुआ है तथा वह क्षेत्रज्ञ भी जो है और जिस प्रभाववाला है, व
- 13.12अ. 13
Knowledge is seeing reality steadily; everything else is confusion.
अध्यात्मज्ञानमें नित्यनिरन्तर रहना, तत्त्वज्ञानके अर्थरूप परमात्माको सब जगह देखना यह पूर्वोक्त साधनसमुदाय तो ज्ञान है औ
- 13.24अ. 13
Clear seeing frees you while life still continues.
इस प्रकार पुरुषको और गुणोंके सहित प्रकृतिको जो मनुष्य अलगअलग जानता है, वह सब तरहका बर्ताव करता हुआ भी फिर जन्म नहीं लेता
- 13.35अ. 13
Clear seeing separates you from what changes and opens the way beyond it.
इस प्रकार जो ज्ञानरूपी नेत्रसे क्षेत्र और क्षेत्रज्ञके अन्तरविभाग को तथा कार्यकारणसहित प्रकृतिसे स्वयंको अलग जानते हैं,
- 14.11अ. 14
Inner brightness is the sign that clarity is taking over.
जब इस मनुष्यशरीरमें सब द्वारोंइन्द्रियों और अन्तःकरण में प्रकाश स्वच्छता और ज्ञान विवेक प्रकट हो जाता है, तब जानना चाहिय
- 14.19अ. 14
Freedom begins when you stop mistaking qualities for a personal doer.
जब विवेकी विचारकुशल मनुष्य तीनों गुणोंके सिवाय अन्य किसीको कर्ता नहीं देखता और अपनेको गुणोंसे पर अनुभव करता है, तब वह मे
- 18.1अ. 18
Clear seeing begins with asking what must be separated.
अर्जुन बोले हे महाबाहो हे हृषीकेश हे केशिनिषूदन मैं संन्यास और त्यागका तत्त्व अलगअलग जानना चाहता हूँ ॥
- 18.25अ. 18
Blind action begins where clear seeing is absent.
जो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा और सामर्थ्यको न देखकर मोहपूर्वक आरम्भ किया जाता है, वह तामस कहा जाता है ॥
- 18.30अ. 18
True intelligence recognizes the difference between bondage and freedom.
हे पृथानन्दन जो बुद्धि प्रवृत्ति और निवृत्तिको, कर्तव्य और अकर्तव्यको, भय और अभयको तथा बन्धन और मोक्षको जानती है, वह बु
- 18.31अ. 18
Restless intelligence cannot tell duty from harm.
हे पार्थ मनुष्य जिसके द्वारा धर्म और अधर्मको, कर्तव्य और अकर्तव्यको भी ठीक तरहसे नहीं जानता, वह बुद्धि राजसी है ॥