विषय · 10 श्लोक

भगवद् गीता में Kshetra Kshetrajna

भगवद् गीता के 10 श्लोक जो kshetra kshetrajna पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 13.5Speaker: Krishna
ऋषिभिर्बहुधा गीतं छन्दोभिर्विविधैः पृथक्
ब्रह्मसूत्रपदैश्चैव हेतुमद्भिर्विनिश्िचतैः
अर्थ · हिन्दी
यह क्षेत्रक्षेत्रज्ञका तत्त्व ऋषियोंके द्वारा बहुत विस्तारसे कहा गया है तथा वेदोंकी ऋचाओंद्वारा बहुत प्रकारसे कहा गया है और युक्तियुक्त एवं निश्चित किये हुए ब्रह्मसूत्रके पदोंद्वारा भी कहा गया है ॥
सार
Sages, Vedic hymns, and the Brahma Sutras all point to the same understanding of the field and the knower.
Ancient sources converge on one disciplined way of seeing.
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भगवद् गीता 13.10Speaker: Krishna
असक्ितरनभिष्वङ्गः पुत्रदारगृहादिषु
नित्यं समचित्तत्वमिष्टानिष्टोपपत्तिषु
अर्थ · हिन्दी
आसक्तिरहित होना पुत्र, स्त्री, घर आदिमें एकात्मता घनिष्ठ सम्बन्ध न होना और अनुकूलताप्रतिकूलताकी प्राप्तिमें चित्तका नित्य सम रहना ॥
सार
Do not cling to family and possessions, and keep your mind steady whether things go your way or not.
Clinging fades; the mind stays level.
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भगवद् गीता 13.12Speaker: Krishna
अध्यात्मज्ञाननित्यत्वं तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम्
एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यदतोन्यथा
अर्थ · हिन्दी
अध्यात्मज्ञानमें नित्यनिरन्तर रहना, तत्त्वज्ञानके अर्थरूप परमात्माको सब जगह देखना यह पूर्वोक्त साधनसमुदाय तो ज्ञान है और जो इसके विपरीत है वह अज्ञान है ऐसा कहा गया है ॥
सार
Real knowledge means staying aware of the inner reality and seeing the supreme reality everywhere. Anything that misses this is ignorance.
Knowledge is seeing reality steadily; everything else is confusion.
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