मत्कर्मकृन्मत्परमो मद्भक्तः सङ्गवर्जितः । निर्वैरः सर्वभूतेषु यः स मामेति पाण्डव ॥
Hindi · हिन्दी
हे पाण्डवन जो मेरे लिये ही कर्म करनेवाला, मेरे ही परायण और मेरा ही भक्त है तथा सर्वथा आसक्तिरहित और प्राणिमात्रके साथ निर्वैर है, वह भक्त मेरेको प्राप्त होता है ॥
English
O Pandava, the devotee who works for Me alone, takes Me as the highest goal, is devoted to Me, is free from attachment, and bears no enmity toward any being, comes to Me.